डम्पर की टक्कर से कार सवार चार की मौत

जिले की सतलासणा तहसील के निकट रविवार सुबह डम्पर की टक्कर से कार में सवार चार जनों की मौत हो गई। मृतकों में मां व उसकी दो संतान भी शामिल हैं। इनमें सतल

By: मुकेश शर्मा

Published: 11 Dec 2017, 08:55 PM IST

महेसाणा।जिले की सतलासणा तहसील के निकट रविवार सुबह डम्पर की टक्कर से कार में सवार चार जनों की मौत हो गई। मृतकों में मां व उसकी दो संतान भी शामिल हैं। इनमें सतलासणा तहसील के जसपुरिया गांव निवासी मोहनभाई प्रजापति, कैलाशबेन वालजीभाई प्रजापति, कैलाशबेन की पुत्री दिशा व पुत्र केनिल शामिल हैं, जबकि वालजीभाई घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब कार खड़ी थी। जसपुरिया निवासी प्रजापति परिवार कार में जा रहा था। सतलासणा के निकट रास्ते में किसी कारण से कार को रोका। इस दौरान पीछे से आ रहे डम्पर ने कार को टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना में कार सवार माता, पुत्र व पुत्री सहित चार जनों की मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर सतलासणा पुलिस पहुंची। हादसे के बाद डम्पर चालक फरार हो गया।

प्लास्टिक की बोरी में बंधा मिला अज्ञात युवक का शव

वटवा के वेटिकन चौकी इलाके में शक्ति डेवलपर्स की ऑफिस के पीछे झाडिय़ों से एक प्लास्टिक की बोरी में बंधी हुई हालत में अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ है। गला व चेहरा कपड़े से बंधा हुआ था और सिर पर गंभीर चोट का निशान था, जिससे हत्या करने के बाद शव को बोरी में बांधकर फेंके जाने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है। मृतक की आयु करीब ३०-३५ साल की है। इसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है। मृतक ने आसमानी रंग की लाइनिंग वाली शर्ट पहनी हुई है। शव फूली हुई अवस्था में मिला है।

जैन संतों ने किया रागोपनिषद ग्रंथ का विमोचन

जैन संघ में चार मुमुक्षुओं के दीक्षा समारोह के तीसरे दिन रविवार को संगीत का कार्यक्रम में रागोपनिषद ग्रंथ का विमोचन किया गया।आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्वर महाराज के शिष्यों ने इस ग्रंथ को तैयार किया। इसमें संगीतकार अलाप देसाई ने स्वर दिया है। ग्रंथ के विमोचन समारोह में आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्वर महाराज ने कहा कि उन्होंने थोड़े दिन पूर्व एक पुस्तक पढ़ी थी, जिसमें लिखा था कि जैन साधुओं का जीवन नीरस होता है। इसे पढक़र उन्हें बहुत आघात लगा था।

इसका जवाब रागोपनिषद ग्रंथ है। इस ग्रंथ से साबित होता है कि साधुओं का जीवन रसप्रद होता है। आचार्य रत्नसुंदर सुरी ने कहा कि मदिरा का नशा एक दिन होता है। वासना का नशा पांच-दश वर्ष चलता लेकिन प्रभु भक्ति नशा जन्मोजन्म तक चलता है। इस अवसर पर एल.डी. इंस्टीट्यूट के निदेशक जीतेन्द्रभाई, जैन संघ के बाबुभाई सरेमल, रमेशभाई पटेल और संगीतकार उपस्थित रहे।

मुकेश शर्मा Reporting
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