बांस की लकड़ी व नारियल के छिलकों से बनाए गणपति

बांस की लकड़ी व नारियल के छिलकों से बनाए गणपति

Gyan Prakash Sharma | Publish: Sep, 16 2018 04:07:46 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

इको-फ्रेंडली गणेश


वडोदरा. गणेश महोत्सव के दौरान इस बार ज्यादातर गणेशजी की प्रतिमाएं इक्रो-फ्रेंडली दिखाई दे रही हैं। कहीं फिटकरी से गणपति स्थापित किए गए हैं, तो कहीं चॉकलेट, मिट्टी, कागज आदि से गणपति की प्रतिमा तैयार की गई हैं। कारेलीबाग में श्री गणेश मंडल की ओर से बांस की लकड़ी व नारियल के छिलके और न्यूजपेपरों की मदद से साढ़े ११ फीट ऊंची १०० किलो की प्रतिमा विराजमान की गई है।
शहर के कारेलीबाग के वल्लभनगर क्षेत्र में पिछले सात वर्षों से इसी प्रकार लकड़ी, दलहल व मोती आदि से गणपति की प्रतिमा तैयार की जाती है, लेकिन इस बार बांस, नारियल व कागजों से गणपति की प्रतिमा बनाई गई है।
मंडल के सदस्यों का कहना है कि गत वर्ष ७०-८० किलो न्यूजपेपरों से गणपति बनाए गए थे, लेकिन इस बार कागज का कम उपयोग करने के लिए ढांचा बनाने में बांस की लकड़ी व नारियल के छिलकों का उपयोग किया गया है। करीब साढ़े ११ फीट ऊंची व ४० दिन में तैयार की गई इस प्रतिमा को बनाने में मंडल के १५ सदस्य रोजाना तीन-चार घंटे का समय देते थे। इसके अलावा, सजावट के लिए न्यूजपेपरों से ३०-४० फ्लावर बनाए गए हैं।

 

बांस के ढांचे का अगले वर्ष भी उपयोग :
वेस्ट से बेस्ट तैयार की गई गणपति प्रतिमा को नवलखी मैदान में बनाए गए कृत्रिम तालाब में विसर्जन किया जाएगा, जिसमें कागज पानी में गल जाएगा, जबकि लकड़ी को ढांचे का पुन: आगामी वर्ष में उपयोग किया जाएगा।

 

 

Eco-friendly Ganesha

यहां पेड़ के तने पर बनाए गणपति
वडोदरा के गोत्री क्षेत्र स्थित आनंद विद्याविहार स्कूल के शिक्षकों ने इस वर्ष मिट्टी, कागज या पीपीओ की नहीं, अपितु पेड़ पर ही गणपति बनाए गए हैं। आर्ट के शिक्षकों ने दो-तीन घंटे में पीले गुलमोहर के तने में गणेशजी बनाए गए हैं। सजावट के लिए गणपति के पैरों के पास सफेद एवं गुलाबी कागज से सुंदर कमल के फूल बनाए गए हैं।
स्कूल के प्राचार्य का कहना है कि प्रकृति की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। प्रकृति को बचाएंगे और उसकी रक्षा करेंगे तो हमें किसी से डरने की जरुरत नहीं, क्योंकि आज की ग्लोबल वोर्मिंग समस्या को विघ्नहर्ता ही हल करेंगे।

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