आखिर किडनी देकर बचा लिया प्रेमी को

प्रेमिका की अनूठी भेंट...

-समाज के दबाव में अलग जरूर हुए थे लेकिन फिर बदले हालातों से एक हुए

 

By: Omprakash Sharma

Published: 03 Mar 2019, 10:06 PM IST

अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल कैंपस स्थित इंस्टीट्यूट आफ किडनी डिसिज सेंटर (आईकेडीआरसी) में पिछले दिनों एक युवक के किडनी ट्रान्सप्लान्ट के पीछे की कहानी फिल्मों से कम नहीं है। दरअसल किडनी दाता युवती और मरीज की कहानी कुछ इस तरह की है कि हर कोई कह देगा दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं। राजस्थान के एक कस्बे में यूं तो लगभग १८ वर्ष पूर्व यह कहानी शुरू हुई थी लेकिन तब परिजनों ने समाज में बदनामी का हवाला देकर उन्हें अलग-अलग मोड़ पर खड़ा कर दिया था। एक साथ जीने मरने की बातें करने वाले युगल को समाज के दबाव में झुकना पड़ा। युवक की अन्य युवती से तो युवती की अन्य युवक के साथ शादी कर दी गई। उसके बाद बदले हालातों ने दोनों को झकझोर कर रख दिया। युवती कुछ वर्षों बाद जहां विधवा हो गई थी वहीं युवक की पत्नी भी बीमारी से चल बसी थीं। दुखों का पहाड़ यहीं खत्म नहीं हुआ। युवक को दोनों किडनी से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में बिना किसी लोभ लालच के युवती ने अपनी किडनी देकर युवक को नया जीवन दिया।
राजस्थान के एक कस्बे में रहने वाले ३८ वर्षीय दीपक (नाम परिवर्तित) का पिछले दिनों अहमदाबाद के आईकेडीआरसी अस्पताल में सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। किडनी देने वाली ३५ वर्षीय युवती निर्मला (नाम परिवर्तित) दीपक की पड़ौसी है। गुरुवार को चिकित्सक के समक्ष बैठे इस युगल की कहानी सुनी तो ऐसा लगा मानों यह युगल एक दूसरे के लिए ही बना है। दीपक ने बताया पडौसी के नाते निर्मला को वह बचपन से ही जानता था लेकिन करीब अठारह वर्ष पूर्व दोनों एक दूसरे को चाहने लगे थे। इसकी भनक जब परिजनों को लगी तो जाति-पांति और समाज में इज्जत का हवाला देकर उन्हें अलग-अलग कर दिया। इसके बाद दीपक की शादी अन्य युवती से हो गई। उसके पांच वर्ष बाद निर्मला की भी शादी अन्यंत्र कर दी गई। परिजनों के इस फैसले से दोनों दुखी जरूत थे लेकिन उसके बाद उन्होंने एक दूसरे को मानो भुला दिया था। वर्ष २०१० में जो हुआ था उससे निर्मला को बुरी तरह झकझोर दिया। निर्मला के पति की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई थी। उसके दो बच्चे (एक पुत्र और एक पुत्री) हैं। पड़ौसी होने के नाते इस संबंध में जब दीपक को पता चला तो उन्हें भी काफी दुख हुआ था। उसके कुछ वर्षों बाद ही (२०१६) में दीपक की पत्नी भी ब्लड कैंसर के चलते चल बसी थीं। दोनों पर ही दुखों का पहाड़ टूट गया था। दीपक का दुख यहीं खत्म नहीं हुआ। उसी वर्ष बीमार दीपक को किडनी रोगी घोषित कर दिया और उसका विकल्प मात्र ट्रान्सप्लान्ट बताया गया था।
बस अड्डे पर फिर से फूट गए अंकुर!
दीपक की पत्नी और निर्मला के पति की मौत से दोनों वाकिफ थे। इस बीच दीपक की किडनी खराब होने के चलते वे पास के शहर में अस्पताल जाने के लिए निकले थे। उसी बस स्टेंड पर अनायास ही निर्मला का भी आना हो गया था। बात चीत हुई तो दोनों की स्थिति से एक दूसरे से हमदर्दी होने लगी। निर्मला को पता चला कि दीपक किडनी ट्रान्सप्लान्ट से ही बच पाएगा। वह उसी समय से वह दीपक के साथ हो गई और अस्पताल में अपनी किडनी देने की पेशकश कर दी। लेकिन यह सब इतना सरल भी नहीं था क्योंकि ऑर्गन ट्रान्सप्लान्ट के अन्तर्गत यह सही नहीं था। इसके लिए उन्होंने औपचारिकता के लिए शादी भी की थी लेकिन ट्रान्सप्लान्ट कमेटी ने भी कुछ निमयों के अन्तर्गत आपत्ति जताई थी। इसके बाद उन्होंने अदालत का सहारा लिया था। जिसके आधार पर यह ट्रान्सप्लान्ट सफलतापूर्वक हो गया था।
किडनी भी शतफीसदी मैच
आईकेडीआरसी के नेफ्रोलोजिस्ट विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. पंकज शाह ने बताया कि किडनी दाता निर्मला और मरीज का रक्तग्रुप मैच होने के कारण इसमें क्रॉस ट्रान्सप्लान्ट की जरूरत भी नहीं हुई। निर्मला ने बताया वे अपने पति को नहीं बचा पाईं थी जिसका दुख उन्हें हमेशा रहेगा।
परिजनों को अभी भी नहीं है भनक
निर्मला ने दीपक को किडनी दी है इस बात की भनक अभी तक निर्मला के परिजनों को नहीं है। लेकिन दीपक के परिजनों को इसका पता चला है। यूं तो अभी भी यह युगल अलग-अलग ही रहता है। दोनों ने बहुत जल्द एक साथ रहने का निर्णय भी किया है।

Omprakash Sharma Reporting
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