कुछ पदयात्रियों ने समय से पहले ही शुरू कर दी परिक्रमा

गिरनार परिक्रमा १९ से

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 15 Nov 2018, 05:17 PM IST

जूनागढ़. गिरनार की परिक्रमा भले ही १९ नवम्बर से शुरू होने वाली है, लेकिन कुछ पदयात्रियों ने समय से पहले ही परिक्रमा शुरू कर दी है। भीड़ से बचने व प्राकृतिक सौन्दर्य का लुत्फ उठाने के लिए पांच दिन पहले ही भक्तों ने यात्रा शुरू कर दी है।
परम्परागत रूप से यह यात्रा देवदिवाली की शाम को गिर तलहटी में एकत्रित होते हैं और फिर शुरू करते हैं गिरनार की पावनकारी परिक्रमा।


ऐसे पूरी करते हैं परिक्रमा :
प्रथम दिन १९ नवम्बर की शाम को पदयात्री तलहटी से जडेश्वर मंदिर परिसर व उसके सामने स्थित नारायणधरा तक करीब दो किलोमीटर मार्ग पर पूरी रात पदयात्री जंगल का लुत्फ उठाते हैं। इसके बाद दूसरे दिन, बारस के ब्रह्ममुहूर्त में तलहटी के पदयात्री परिक्रमा का प्रारंभ कर दूधेश्वर मंदिर से आगे बढ़ते हैं और इटवा की घोड़ी चढ़कर चार चौक होकर महाकाली के चौक होकर जीणाबावा की मढ़ी तक का रास्ता तय करते हैं और जंगल में प्रथम रात्रि विश्राम करते हैं।
तेरस की सुबह वहां से निकलकर माळवेला की घोड़ी चढ़कर वहां पहुंचती है, जो जंगल का मध्यभाग है। यहां रात्रिविश्राम के बाद समग्र संघ चौदस की सुबह नलपाणी की घोड़ी से गुजरकर तीन रास्ता होकर बोरदेवी पहुंचेगी। परिक्रमा का यहां अंतिम पड़ाव है। रात्रि विराम के बाद सभी पूर्णिमा की सुबह वहां से रवाना होकर शाम तक भवनाथ क्षेत्र में पहुंचेंगे। इसके साथ ही परिक्रमा पूर्ण हो जाती है।

 

ताना-रीरी महोत्सव १७ से
महेसाणा. जिले के वडनगर शहर की ताना-रीरी समाधि स्थल पर १७ नवम्बर से ताना-रीरी महोत्सव मनाया जाएगा, जो दो दिन चलेगा।
प्रथम दिन डिप्टी सीएम नितिन पटेल व अंतिम दिन सीएम विजय रूपाणी की उपस्थिति विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
जिला विकास अधिकारी एम. वाय. दक्षिणी व निवासी अतिरिक्त कलक्टर हर्षद वोरा के अनुसार प्रथम दिन शनिवार शाम ७.३० बजे कलागुरु महेश्वरी नागराजन व नृत्य कला केन्द्र अहमदाबाद की ओर से प्रार्थना, नृत्य, भरतनाट्यम व समूह कृति प्रस्तुत की जाएंगी। इसी प्रकार दूसरी दिन भी विभिन्न कलाकारों की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी।
महोत्सव के बाद १९ नवम्बर को एम्की थिएटर वडनगर में महाराणा प्रताप की ओर से किए कए कल्दीघाटी युद्ध की गोरवगाथा एलईडी स्क्रीन पर दिखाई जाएगी।


इसलिए मनाते हैं महोत्सव :
वडनगर की दो नागर बहनों की याद में राज्य सरकार की ओर से कला एवं संस्कृति विरासत को बनाए रखने का काम ताना-रीरी महोत्सव की ओर से हो रहा है। तानसेन ने दीपक राग गाया, जिससे उनके शरीर में अग्नि ज्वालाएं उठ गई थी। बाद में मेघ मल्हार राग गाकर दोनों बहनों ताना-रीरी ने अग्नि शांत की थी। यह खबर जब अकबर बादशाह के पास पहुंची तो उन्होंने दोनों बहनों को दिल्ली दरबार में बुलाया था, लेकिन दोनों बहनों ने दिल्ली जाने की बजाए वडनगर में ही आत्मदाह कर लिया था। ऐसे में दोनों बहनों की याद में हर वर्ष ताना-रीरी महोत्सव मनाया जाता है।

Gyan Prakash Sharma
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