जितना भाव, उससे ज्यादा तो मजदूरी व वाहन का खर्चा

हरी मिर्च के भाव गिरने से किसान परेशान

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 18 Dec 2018, 10:07 PM IST

महेसाणा. जिले के बहुचराजी तहसील के करणपुर गांव में हरी मिर्च के भाव नहीं मिलने से किसान परेशान है। हालात यह हैं कि मार्केट तक पहुंचाने में जो खर्चा हो रहा है, उसकी तुलना में भाव बहुत कम हैं। अन्य फसलों को तो पशुओं को भी खिला सकते हैं और खेत में भी छोड़ सकते हैं, लेकिन मिर्च को ना तो पशु ही खाते हैं और ना ही खेत में भी छोड़ सकते हैं। ऐसे में किसान घाटा भुगतकर भी मिर्ची की फसल को मार्केट में पहुंचाने के लिए मजबूर हुए हैं।
किसानों का कहना है कि मार्केट में जो भाव मिर्च का मिल रहा है, उससे से मजदूरी भी नहीं निकल रही है, फिर वाहन का खर्चा तो अलग से भुगतना पड़ रहा है।


किसानों का कहना :
किसानों का आरोप है कि सिंचाई के अभाव में जैसे-तैसे फसल तैयार की, लेकिन भाव इतने गिर गए हैं कि मजदूरी भी नहीं निकल रही है। एक बीघे में रोजाना २० किलो मिर्ची का उत्पादन होता है, जिसको बीनने के लिए १०० से १५० रुपए में एक मजदूर आता है। बाद में जब मार्केट में पहुंचते हैं तो २० किलो मिर्ची की कीमत १०० से १५० रुपए है, ऐसे में मजदूरी ही निकल रही है, बाकी वाहन का खर्चा व उत्पादन में किया गया खर्च किसान जेब से भुगतने को मजबूर हो रहे हैं।


चार महीने पहले १५ रुपए किलो था भाव :
किसानों का कहना है कि चार महीने पूर्व मिर्ची का भाव १५-२० रुपए किलो था, जिसके चलते किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ मिर्ची का उत्पादन किया था। पानी की किल्लत के बावजूद इधर-उधर से सिंचाई की और अब जब बिक्री का समय आया तो भाव आधे भी नहीं रहे।
किसानों का कहना है कि अन्य फसलों को खेत में भी छोड़ सकते हैं और पशुओं को भी खिला सकते हैं, लेकिन मिर्ची को ना खेत में छोड़ सकते हैं और ना ही इसे पशु खाते में हैं। ऐसे में मजबूरी में माल मार्केट में पहुंचाना पड़ रहा है।

Gyan Prakash Sharma
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