25 पैसे में एक किलोमीटर दौड़ेगी ये बाइक, 60 की मिलेगी रफ्तार!

GTU, converted electric bike, Petrol, diesel, innovation, startup, Ahmedabad महंगे सफर का बेहतर विकल्प बनेगी कन्वर्टेड इलैक्ट्रिक बाइक, आसमान छूती पेट्रोल की कीमतों को देख आया विचार, जीटीयू के दो विद्यार्थियों ने छह साल की रिसर्च के बाद पाई सफलता, इलैक्ट्रिक बाइक में कन्वर्ट कराने में १५ से २० हजार का खर्च

By: nagendra singh rathore

Updated: 01 Mar 2021, 11:02 PM IST

अहमदाबाद. गुजरात तकनीकी विश्वविद्यालय (जीटीयू) के विद्यार्थियों ने आसमान छूती पेट्रोल की कीमतों के चलते महंगे हो रहे दुपहिया वाहन के सफर को सस्ता करने का विकल्प उपलब्ध कराया है।
अर्पित चौहान और कार्तिक आत्रेया ने मौजूदा पेट्रोल बाइक को कन्वर्ट करके इलैक्ट्रिक बाइक में परिवर्तित करने में सफलता पाई है। दोनों का दावा है कि उन्होंने जिस तकनीक का इस्तेमाल करके कन्वर्टेड किट को तैयार किया है। उसकी बदौलत इस बाइक से सफर करने पर प्रति किलोमीटर महज २५ पैसे खर्च होंगे। इसमें लगाई गईं ६ बैटरी को ९० मिनट चार्ज करने पर 80 किलोमीटर तक का सफर ६० किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तय किया जा सकता है। इसमें चार लैटएसिड और दो लिथियम बैटरी उपयोग में ली गई हैं। इस बैटरी को 2000 बार चार्ज किया जा सकता है। चार्ज करने में महज दो यूनिट बिजली खर्च होगी। जिसका बिल 12 से 20 रुपए होगा। जबकि अभी देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल प्रति लीटर ८५ से 100 रुपए है। ये बाइक गेयर लैस है, जिससे चलाने में भी आसान है।
विद्यार्थियों का कहना है कि मौजूदा पेट्रोल बाइक या स्कूटर को इलैक्ट्रिक बाइक-स्कूटर में परिवर्तित करने में १५ हजार से २० हजार रुपए की लागत आएगी, जो अभी मौजूदा समय में मिलने वाली महंगी इलैक्ट्रिक बाइकों-स्कूटरों से काफी कम है।
जीटीयू के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (जीएसएमएस) में इनोवेशन, एन्टरप्रिन्योरशिप एवं वेंचर डेवलपमेंट से एमबीए करने वाले इन दोनों ही विद्यार्थियों ने एर्की मोटर्स के नाम से स्टार्टअप भी शुरू किया है। एसीएस कॉलेज बैंग्लुरू से मैकेनिकल ब्रांच में बीई की है। ६ साल की रिसर्च के बाद इस किट को बनाने में सफलता पाई है।
जीटीयू कुलपति डॉ नवीन शेठ ने विद्यार्थियों के इस इनोवेशन को सराहा है। जीटीयू ने इस इनोवेशन को मूर्त रूप देने में मददगार होते हुए स्टूडेंट इनोवेशन स्टार्टअप पॉलिसी के तहत दो लाख रुपए की आर्थिक मदद की है।

पुराने वाहनों को कबाड़ होने से रोकने में मददगार
अर्पित चौहान बताते हैं कि केन्द्र सरकार ने इस साल के बजट में १५ साल पुराने वाहनों को कबाड़ करने की नीति बनाई है। ऐसे में उनकी यह कन्वर्टेड किट पुराने वाहनों को इलैक्ट्रिक वाहन के रूप में नए सिरे से रोड़ उतारने में मददगार साबित हो सकती है। उनके वाहन कबाड़ में औने-पौने दाम में नहीं बिकेंगे, बल्कि वे उसे ही 15 से 20 हजार में नए इलैक्ट्रिक वाहन के रूप में खुद चला सकेंगे।

वायु-ध्वनि प्रदूषण रोकने में कारगर
कार्तिक आत्रेचा बताते हैं कि पेट्रोल की बाइक से प्रतिकिलोमीटर ५०० ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। १०-१२ डेसिबल का ध्वनि प्रदूषण होता है, जबकि इसमें वायु प्रदूषण होता ही नहीं है। ध्वनि के लिहाज से ३-६ डेसिबल की आवाज आती है। ये पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है।

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