आरोपी की छिपी संपत्ति के बारे में जांच कर बताए सीबीआई

आरोपी  की छिपी संपत्ति के बारे में जांच कर बताए सीबीआई

Uday Kumar Patel | Publish: Sep, 07 2018 09:54:57 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

-अमित भटनागर की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट का निर्देश

-11 बैंकों के साथ 2654 करोड़ का मामला

 

 

अहमदाबाद. 11 बैंकों के साथ 2654 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार आरोपी अमित भटनागर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गुजरात उच्च न्यायालय ने सीबीआई से कहा है कि याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति सार्वजनिक किए जाने के अलावा यदि कोई अन्य छिपी संपत्ति हो, तो इसकी जांच कर न्यायालय को बताए।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी कोई छिपी संपत्ति नहीं है। जो भी संपत्ति थी, वह सभी सार्वजनिक कर दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितम्बर को होगी।
इससे पहलेे भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई से कहा था कि भटनागर की संपत्ति बेचकर ऋण की भरपाई किए जाने की पद्धति या क्या संभावनाएं हो सकती है, इस बारे में पता लगाना चाहिए। इस प्रक्रिया में याचिकाकर्ता के वकील व अन्य प्रतिनिधियों के अलावा बैंकों के अधिकारियों को भी सीबीआई के साथ रखा जा सकता है।
उधर सीबीआई की ओर से कहा गया था कि याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है, इस कारण ऋण की भरपाई कैसे हो सकती है।
आरोपी ने न्यायालय के समक्ष नियमित जमानत के लिए गुहार लगाई है। इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने बैंक से जो ऋण लिया है, इससे ज्यादा उसकी संपत्ति का मूल्य ज्यादा है। इस कारण वह ऋण की भरपाई कर सकने में सक्षम है।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने आरोपी को अपनी पुत्री की विदेश में उच्च शिक्षा की पढ़ाई को लेकर पैसे की व्यवस्था करने के एवज में अंतरिम जमानत प्रदान की थी। आरोपी के पिता व कंपनी के मालिक सुरेश भटनागर को स्वास्थ्य के आधार पर नियमित जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा आरोपी के अन्य भाई सुमित भटनागर ने भी नियमित जमानत याचिका दायर की है।
सीबीआई ने इस वर्ष 13 महीने में इस मामले में आरोपी भटनागर पिता-पुत्रों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने गत अप्रेल महीने में कंपनी के संस्थापक, प्रबंध निदेशक, संयुक्त निदेशक व बैंकों के कथित अधिकारी, कर्मचारियों के विरुद्ध विश्वासघात व ठगी का मामला दर्ज किया था। आरोपियों पर बैंकों को २६५४ करोड़ रुपए की चपत लगाने का आरोप है।

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