Gujarat: छत्तीसगढ़ के सीएम बघेल का गुजरात के सीएम को न्यौता एक अच्छी शुरुआत

Gujarat CM Bhupesh Baghel, Chhattisgarh CM Bhupendra Patel

By: Uday Kumar Patel

Updated: 13 Oct 2021, 10:32 PM IST

अहमदाबाद. राजनीति में शुचिता अब काफी कम देखने को मिलती है। आम लोग राजनीति को पहले की तरह उस नजरिए से नहीं देखते हैं। नया वाकया छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को आमंत्रण देने का है। ऐसी बात राजनीति के इस दौर में एक सुकून भरा है। आज जब एक राजनीतिक दल के लोग दूसरी पार्टी के लोगों को फूटी आंख नहीं सोहाते। एक दूसरे पर टीका-टिप्पणी में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। विरोधी पार्टियों के लिए जिस तरह की भाषा या शब्दों का इस्तेमाल करते हैं वह जगजाहिर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल को न्यौता देना एक अच्छी शुरुआत मानी जा सकती है।
बघेल ने पटेल को यह आमंत्रण छत्तीसगढ़ में आगामी 28 अक्टूबर से आयोजित होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में बतौर अतिथि शामिल होने के रूप में भेजा है। साथ ही उन दिनों राज्य का 21वां राज्योत्सव है। छत्तीसगढ़ की संसदीय सचिव शकुंतला साहू और विधायक उन्नति गणपत जांगड़े ने गांधीनगर में सीएम पटेल से रूबरू भेंट कर यह आमंत्रण दिया। इतना ही नहीं, सीएम पटेल से गुजरात के आदिवासी कलाकारों को इस महोत्सव में भाग लेने के लिए रायपुर भेजने का अनुरोध किया गया।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है वहीं गुजरात में भाजपा की सरकार है। फिर भी छत्तीसगढ़ के सीएम का गुजरात के सीएम को बुलाना एक अच्छी शुरुआत है।
ऐसी ही शुचिता दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में गत अगस्त महीने में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की ओर से देखने को मिली। डीएमके के मुखिया ने 65 लाख स्कूल बैग पर पूर्व मुख्यमंत्री और एमआईएमडीएम की सुप्रीमो जयललिता और पूर्व मुख्यमंत्री ई प्लानीसामी के फोटो हटाने की जगह दोनों के फोटो बरकरार रखे जाने का निर्णय लिया। अमूमन सत्ता बदलने के बाद नए दल पूर्व दल की कई चीजों को बदल देते हैं, लेकिन स्टालिन ने ऐसा कर बेहतर संदेश दिया। इससे राज्य सरकार के 13 करोड़ रुपए बचे जिसे इस रकम का अन्य कल्याण कारी योजनाओं में लागू करने को कहा गया। विरोधी दलों ने भी इस कदम को सराहा।
इससे पहले सरकार बनाने के तुरंत बाद कोरोना की दूसरी खतरनाक लहर के दौरान उन्होंने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई। कोविड महामारी को लेकर बनाये गए बहुदलीय कोविड सलाहकार पैनल में स्टालिन ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री को भी शामिल किया। कभी इंदिरा गांधी संयुक्त राष्ट्र में संबोधन के लिए भारत के प्रतिनिधि के रूप में तब के विपक्ष के अटल बिहारी वाजपेयी को भेजा करतीं थीं। लेकिन अब ऐसी घटनाएं कभी-कभार इक्का-दुक्का देखने को मिलती है। यदि यह शुरुआत बरकरार रहे तो यह स्वस्थ लोकतंत्र में और चार चांद लगाएगा।

(उ. प.)

Uday Kumar Patel Reporting
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