राज्य सरकार की अनुमति के बगैर नहीं बंद हो सकेंगी इकाइयां

Gujarat government, labour act, industrial units, labour minister: गुजरात विधानसभा में औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक पारित

By: Pushpendra Rajput

Published: 23 Sep 2020, 08:40 PM IST

गांधीनगर. ऐसी इकाइयां जिनमें 300 से ज्यादा कर्मचारी हों उन इकाइयों को बंद करने या कर्मचारियों की छंटनी करने से पहले राज्य सरकार (state government) से अनुमति लेनी होगी। इसके बगैर इकाइयां बंद नहीं की जा सकेंगी। वहीं पन्द्रह दिनों के औसतन वेतन के अलावा मुआवजे के तौर पर तीन माह का औसतन वेतन (salary) भी देना होगा। छंटनी के किस्सों में कर्मचारियों (employees) को तीन माह की नोटिस देनी होगी। नोटिस और वेतन देकर कर्मचारी को नहीं निकाला जा सकेगा। इन प्रावधानों के साथ श्रम रोजगार (labour minister) मंत्री दिलीप ठाकोर की ओर से गुजरात विधानसभा (Gujarat vidhan sabha) में पेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व 100 अथवा उससे अधिक कर्मचारियों वाली औद्योगिकी इकाइयां कर्मचारी की छंटनी कर देती थी और इकाइयां भी बंद कर देती थी, लेकिन अब इस प्रावधान में संशोधन किया गया है, जिसमें 300 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली इकाइयों को छंटनी या इकाई बंद करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी जरूरी होगी। ऐसे ही संशोधन राजस्थान, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी किए गए हैं।

विधेयक को विधानसभा में पेश करते श्रम रोजगार मंत्री ठाकोर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से गुजरात े के आर्थिक और औद्योगिक विकास के हम सभी साक्षी हैं। श्रम और रोजगार विभाग समय-समय श्रम कानूनों में क्रियान्वयन करता है। विभिन्न श्रम कानूनों में औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 भारत सरकार ने गठित किया था, जिसका उद्देश्य मालिक और कर्मचारियों के बीच विवाद का निपटारा, और औद्योगिक शांति बनाए रखना रहा है। इसके जरिएही राज्य सरकार ने मालिक और कर्मचारियों के हितों का रक्षण किया है। उन्होंने कहा कि अब यह विधेयक अध्यादेश का स्थान लेगा। सरकार ने संशोधन को लागू करने के लिए दो माह पूर्व अध्यादेश जारी किया था। कर्मचारियों का शोषण रोकने के लिए 100 से 300 कर्मचारियों वाली इकाइयों में भी यह अधिनियम लागू किया जा सकेगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों में मालिक और कर्मचारियों के बीच विवाद और मतभेद का निपटारा करना है। इसके मद्देनजर ही इस प्रावधान में आर्थिक उदारीकरण, राष्ट्रीय विकास और रोजगार की समस्या के मद्देनजर संशोधन किए गए हैं।

Pushpendra Rajput Reporting
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