राज्य में गंदे पानी के शुद्धिकरण की नीति घोषित

राज्य में गंदे पानी के शुद्धिकरण की नीति घोषित

Uday Kumar Patel | Publish: May, 29 2018 04:36:10 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

-सीएम ने कहा कि गुजरात की यह नीति पूरे देश को राह दिखाएगी

 

गांधीनगर. पानी की समस्या के ठोस समाधान को लेकर राज्य सरकार ने गंदे पानी के शुद्धिकरण की नीति की घोषणा की। गटर के शुद्ध किए पानी के पुन: उपयोग की नीति की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि पावरग्रिड की तरह वाटरग्रिड तैयार करने वाला गुजरात राज्य की यह नीति वॉटर रिट्रीट मैनेजमेंट में पूरे देश को राह दिखाएगी।
सीएम के अनुसार अब हमें पानी के अन्य उपयोग के लिए भूगर्भ जल के भार को कम करना होगा। सतह के जल का उपयोग का घटाना होगा। पीने के पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर अब हमें रिसोर्स, रिड्यूस, रिट्रीट व रियूज की नीति बनानी होगी। पानी की जरूरतों के लिए नए-नए संसाधनों व स्त्रोत का निर्माण करना होगा। गटर के गंदे पानी को शुद्ध करने की ठोस योजना बनानी होगी। पानी का गैर जरूरी उपयोग रोकना होगा और पानी के फिर से उपयोग करने को अपनाना होगा।
उन्होंने राज्य की प्रत्येक नगरपालिकाओं-महानगरपालिकाओं से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार स्थापित कर रिट्रीट वाटर का अहम स्त्रोत तैयार करने की अपील की।
इनमें 150 से ज्यादा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने तथा पानी की जरूरतों का 50 फीसदी रिट्रीट वाटर पहुंचाने की योजना है।
सीएम ने कहा कि राज्य के समुद्रतटीय इलाके में खारे पानी को मीठे करने के लिए संयंत्र निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें से एक संयंत्र के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। दूसरे संयंत्र की कार्रवाई जारी है। राज्य सरकार ने ऐसे 8-10 संयंत्र तैयार करना आरंभ कर दिया है।
इस नीति से राज्य की औद्योगिक इकाइयों का योगदान अहम होगा क्योंकि रिट्रीट वाटर का सबसे ज्यादा उपयोग औद्योगिक इकाइयां करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार पानी की परेशानी की बात करने वाले लोगों की बोलती बंद हो गई है। राज्य सरकार ने इस बार राज्यभर के जल स्त्रोतों में उपलब्ध पानी का सुव्यवस्थित आयोजन कर राज्य में जुलाई महीने तक पीने के पानी की ठोस योजना बनाई है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि सरकार की यह नई नीति देश को राह दिखाएगी। राज्य सरकार की इस नीति के कारण भूगर्भ व सतही जल का उपयोग कम होगा और रिट्रीट किए गए पानी उद्योगों को सस्ते दर पर मिलने से उद्योग-नागरिकों की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 600-700 करोड़ की लीटर का पानी खर्च होता है, इसलिए पानी का उपयोग सोच-समझकर करना जरूरी है।

2030 तक 100 फीसदी पानी का पुन: उपयोग
इस नीति के तहत राज्य की 8 महानगरपालिका, 162 नगरपालिका तथा 85 रूर्बन इलाके के गटर के जल को एकत्र कर सुएज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए 2600 एमएलडी गंदे पानी के शुद्धिकरण को उपयोग में लिया जाएगा। फिलहाल 52 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर यह पानी शुद्ध किया जाता है। इसके अलावा 20 नए संयंत्र प्रगति पर है।
वर्ष 2025 तक 75 फीसदी तथा 2030 तक 100 फीसदी पानी का पुन:उपयोग किया जा सकेगा। इस नीति के अमलीकरण के लिए राज्य स्तर की उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह प्रोजेक्ट की मंजूरी, देखरेख, आवंटन, विवादों के समाधान का काम करेगी। इसके अलावा राज्य स्तर की तकनीकी समिति का भी गठन किया गया है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का उपयोग थर्मल पावर प्लांट को अनिवार्य रूप से करना होगा। इसके अलावा जीआईडीसी, एसआईआर, औद्योगिक पार्क और बड़ी औद्योगिक इकाइयों के लिए प्रतिदिन एक लाख लीटर पीने के पानी का उपयोग करना होगा।
इस पानी का निर्माण क्षेत्रों, विकसित इलाकों में टैंकर फिलिंग प्वाइंट के आधार पर अलग से पाइपलाइन डालकर उपयोग में लिया जाएगा। बड़े व्यावसायिक परिसर स्थित इकाइयों में, संस्थाओं में, अग्निशमन, बगीचों, लैंड स्केप गार्डन में उपयोग के लिए इसी पानी का उपयोग किया जाएगा।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned