गुजरात हाईकोर्ट ने कहा.. जिन्हें घर भेजना था, उन्हें क्यों भेजा जेल, प्रवासी श्रमिक पीडि़त हैं अपराधी नहीं

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By: Uday Kumar Patel

Published: 26 Jun 2020, 11:35 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के दौरान कई प्रवासी श्रमिकों ने काम नहीं होने, पैसे नहीं होने और यहां तक खाना-पीना नहीं मिलने के कारण व्यथित दिखे। अधिकांश श्रमिक अपने घर जाना चाहते थे, ऐसे में कई जगहों पर इन प्रवासी श्रमिकों ने हंगामा किया, कहीं पत्थर भी फेेंके और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ इनकी झड़प भी हुई। अहमदाबाद में आआईआईएम के पास झारखंड व बंगाल के कुछ मजदूर अपने वतन लौटना चाहते थे लेकिन पुलिस के साथ इनकी झड़प हुई, पथराव की घटना घटी और बाद में 35 प्रवासी मजदूरों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें जेल भी भेज दिया गया।

गुजरात उच्च न्यायालय ने इन मजदूरों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए यह माना कि ये प्रवासी मजदूर पीडि़त हैं और किसी भी रूप में अपराधी नहीं हैं। न्यायालय ने आगे अपने आदेश में कहा है कि लॉकडाउन के दौरान जब प्रवासी मजदूर बिना किसी काम, पैसे या भोजन के थे तब ऐसी परिस्थिति में इन प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने की बजाय उन्हें जेल भेज दिया गया। इसलिए इन मजदूरों को हिरासत में रखे जाने की जरूरत नहीं है। न्याायालय के आदेश के मुताबिक उन्हें बिना किसी शर्त के निजी बांड के आधार पर जल्द ही रिहा किया जाए। साथ ही सभी मजदूरों को 500 रुपए के निजी बांड पर छोडऩे का निर्देश दिया।

जमानत की गुहार लगाने वाले 33 मजूदरों में से 32 झारखंड के थे और एक पश्चिम बंगाल का था। ये सभी अहमदाबाद में काम के लिए आए थे। लॉकडाउन के कारण इनके पास कोई काम नहीं था, पैसे नहीं थे और यहां तक खाने-पीने का भी इंतजाम नहीं था ऐसे में सभी अपने घर जाना चाहते थे और इन परिस्थितियों में गत 18 मई को यह घटना घटी।

उस दिन अहमदाबाद में वस्त्रापुर इलाके में आईआईएम के पास इन मजदूरों ने पुलिस पर पत्थर फेंके थे और हंगामा मचाया था। वस्त्रापुर पुलिस ने इस मामले में इन 33 प्रवासी मजदूरों को गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, हिंसा, पुलिस को अपनी ड्यूटी करने से रोकने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद इन मजदूरों ने जमानत की गुहार लगाई थी।

Uday Kumar Patel Reporting
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