Ahmedabad : बच्चों के लिए अल्कोहल की आदत से कम नहीं है मोबाइल फोन पर खेलना

Ahmedabad :  बच्चों के लिए अल्कोहल की आदत से कम नहीं है मोबाइल फोन पर खेलना
Ahmedabad : बच्चों के लिए अल्कोहल की आदत से कम नहीं है मोबाइल फोन पर खेलना

Omprakash Sharma | Updated: 09 Oct 2019, 10:58:54 PM (IST) Ahmedabad, Ahmedabad, Gujarat, India

लत छुड़ाने अस्पतालों में भी लाया जा रहा है बच्चों को

अहमदाबाद. बच्चों को मोबाइल फोन का उपयोग करते रहना अल्कोहल की आदत लगाने जैसा है। इसी का परिणाम है कि आए दिन बच्चों को मोबाइल फोन की आदत छुड़ाने के लिए अभिभावकों को अस्पतालों में आना पड़ रहा है।
आज के जमाने में स्मार्ट फोन के बढ़ते चलन से बहुत सारे काम आसान हो चले हैं। लेकिन इसका दुरुपोयग भी बड़ी समस्या होती जा रही है। इन दिनों बच्चों के लिए यह खतरे का संकेत बनता जा रहा है। बच्चों के लिए मोबाइल का अधिक समय तक उपयोग एक प्रकार की लत के समान है। जिस तरह से तम्बाकू, अल्कोहल जैसे व्यसन हैं उसी तरह से मोबाइल फोन पर ज्यादा देर तक खेलना भी व्यसन है। इस व्यसन को छुड़ाने के लिए लोग अपने बच्चों को अस्पताल भी लाने लगे हैं। गुजरात के सबसे बड़े अहमदाबाद मेंटल अस्पताल में भी प्रतिमाह लगभग दो से तीन बच्चों को इस आदत को छुड़ाने के लिए संपर्क किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में दो से तीन बच्चों को इस तरह के उपचार के लिए ले जाया जा रहा है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि निजी अस्पतालों में इस तरह के बच्चों की संख्या कितनी होगी।
अभिभावक हैं जिम्मेदार
मोबाइल फोन पर पेशे के अनुरूप काम करना गलत नहीं है लेकिन पेशे से हटकर चार से छह घंटे प्रतिदिन मोबाइल में खफा देना एडिक्शन ही है। बच्चों को मोबाइल फोन की लत लगाने के लिए तो अभिभावक ही जिम्मेदार हैं। घंटो तक यदि बच्चा फोन पर व्यस्त रहता है तो निश्चित रूप से उसे मोबाइल फोन पर खेलने का एक व्यसन होने की आशंका रहती है, जिसके बाद वह मोबाइल फोन के बिना नहीं रह सकता है। जब स्थिति गंभीर होती है तभी लोग अपने बच्चों को मनोचिकित्सक या फिर साइक्लोजिस्ट के पास ले जाते हैं। इस तरह की आदत को छुड़ाने के लिए अल्कोहल छुड़ाने जैसा ही ट्रीटमेंट की आवश्यकता भी होती है। काउंसलिंग भी की जाती है। मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव से बच्चे की पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
अजय चौहाण, मनोचिकित्सक एवं चिकित्सा अधीक्षक मेंटल अस्पताल, अहमदाबाद

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