Ahmedabad Eye hospital: मधुमेह से खोई आंखों की रोशनी लौटाई

मरीज का पहले ही काट देना पड़ा था पैर

अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल (मेडिसिटी) के आई हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने मधुमेह से लगभग पूरी तरह से खो चुकी आंखों की रोशनी को लौटा दिया। हालांकि इस रोग के कारण मरीज का एक पैर आठ वर्ष पहले काटना पड़ गया था।
राजकोट निवासी ५८ वर्षीय व्यक्ति ३० वर्ष से मधुमेह से पीडि़त होने के कारण एक पैर वर्ष २०११ में काटना पड़ा था। ज्यादा मधुमेह होने के कारण उसका असर शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग हृदय, और आंखों पर भी होना शुरू हो गया। हृदय की जहां बाईपास सर्जरी करानी पड़ी वहीं आंखों के पर्दे पर भी खून जमा होने के कारण मरीज को धीरे-धीरे दिखाई देना बंद हो गया।
पिछले काफी दिनों से लगभग पूरी रोशनी गंवा चुके मरीज को राजकोट से अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में रेफर किया गया। जहां के रेटिना विभाग में भर्ती कर मरीज का विशेष ऑपरेशन किया गया। रेटिना विभागाध्यक्ष डॉ. सोमेश अग्रवाल के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज की लगभग ६० फीसदी रोशनी वापस लौट आई। उन्होंने कहा कि मरीज का हृदय का ऑपरेशन होने के कारण रक्त पतला करने की दवाई भी चल रही है। ऐसे में रक्त आंखों के पर्दे पर जमा हो गया था जिससे पर्दा (रेटिना) खिसक भी गया था। करीब डेढ़ घंटे तक यह ऑपरेशन चला।
सरकार की बेहतर सुविधाओं से संभव
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सरकार की ओर से उचित साधन उपलब्ध होने से इस तरह के ऑपरेशन करना संभव हुआ है। ऐसे ऑपरेशन से पहले लगाए जाने वाले इंजेक्शन भीं निशुल्क उपलब्ध कराए हैं। यहां निशुल्क हुआ यह ऑपरेशन निजी अस्पतालों में पचास से साठ हजार रुपए के खर्च मेें हो पाता।
मधुमेह है तो आंखों पर असर की आशंका
मधुमेह के कोई भी मरीज को समय समय पर नेत्रों की जांच करानी चाहिए। भले ही लोगों को लगता है कि मधुमेह के बीच उनकी आंख सही है लेकिन इसका असर दस से बारह वर्ष बाद होने की पूरी आशंका रहती है। यह ऐसा रोग है जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होते हैं। इनमें से आंख भी एक है। वैसे भी सरकारी अस्पतालों में जांच और उपचार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं जिसका लाभ लोगों को लेना चाहिए।
डॉ. सोमेश अग्रवाल रेटीना विभागाध्यक्ष सिविल अस्पताल

Omprakash Sharma
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