Gujarat: हादसों को न्योता देते सड़कों पर भटकते मवेशी

वाहन चालकों के लिए बने जी का जंजाल, मनपा नहीं लगा पा रही है लगाम

By: Pushpendra Rajput

Updated: 04 Oct 2021, 08:56 PM IST

अहमदाबाद. मौजूदा समय में शहर की किसी भी सड़कों पर निकलें। सड़कों पर मवेशी भटकते नजर आ जाएंगे। सड़कों पर भटकते ये मवेशी हादसों को न्योता दे रहे हैं। वाहन चालकों के लिए ये मवेशी परेशानी का सबब बने हैं। न सिर्फ रात बल्कि दिनदहाड़े भी सड़कों पर इन दिनों डेरा डाले मवेशी नजर आ रहे हैं। विशेष तौर पर बारिश के मौसम में शहर की सड़कों पर मवेशियों का डेरा लगा रहता है। भटकते मवेशियों पर लगाम लगाने के लिए टैग भी लगाए गए थे ताकि आसानी से ऐसे मवेशियों के मालिक तक पहुंचा जा सकेगा, लेकिन महानगरपालिका के मवेशी नियंत्रण विभाग ऐसे लगता महज खाना-पूर्ति करता है। चाहे नेता हों या अधिकारी हर वर्ष शहर की सड़कों से मवेशी राज खत्म करने के दावे करते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद फिर हालात ढाक के तीन पात जैसे हो जाते हैं।

चाहे दिन हो या रात बारिश में सूखी जमीन की तलाश में मवेशी का सड़कों पर भटकते नजर आते हैं, जो वाहन चालकों के लिए घातक बन रहे हैं। चाहे सड़कें हो फिर गली-मोहल्ले हर जगह पानी जमा हो जाता है, जिससे मिट्टी में गालीपन होता है। ऐसे में सूखी जमीन की तलाश में मवेशी सड़कों पर भी अड्डा बना लेते हैं। शाम ढलते सड़कों पर इन मवेशियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। इन दिनों कई जगहों पर तो झुंड में यह नजर आती हैं, जिससे ऐसा लगता है कि इन गायों का कोई भी देखभाल करने वाला है। पशुपालक गायों का दूध निकालने के बाद उनको खदेड़ देते हैं, जो सड़कों, गली-मोहल्लों में भटकती नजर आती है। विशेषतौर पर मवेशियों का यह जमावड़ा हाटकेश्वर, सरदारनगर-नोबलनगर मार्ग, सरसपुर-बापूनगर, रखियाल, चांदखेड़ा, निकोल समेत इलाकों में अक्सर मवेशियों का बीच सड़कों पर डेरा लगा रहता है। कई बार दुपहिया वाहन चालक इनका शिकार ज्यादा बन जाते हैं। कई बार मवेशियों के लडऩे से वाहन चालक भी चोटिल हुए हैं।

करोड़ों का खर्च पर नहीं सुलझी समस्या

सड़कों पर भटकने वाले मवेशियों पर लगाम लगाने के लिए दो वर्ष पूर्व ही महानगरपालिका ने ऐसे मवेशियों को इंजेक्टेबल आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन डाटा) यूनिक टैग लगाने की लगाने की शुरुआत की गई थी, लेकिन करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी भटकते मवेशियों पर कोई नियंत्रण नहीं हुआ। इस टैग की विशेषता यह है कि टैग को किसी हालत में निकाला नहीं जा सकता। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत टैग लगाने के लिए १.०९ करोड़ के खर्च से मनपा लगाए थे, जिसमें पचास हजार मवेशियों को ऐसे टैग लगाने थे। प्रत्येक टैग में यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर है ताकि मालिक का पता चल सकेगा और आसानी से पुलिस कार्रवाई हो सकेगी।

वस्राल रिंगरोड पर कार की चपेट में आई गाय

अहमदाबाद में वस्राल रिंग रोड पर सोमवार सुबह ही एक कार की चपेट में गाय आ गई। इस हादसे में घायल हो गई, जिसे लोगों ने उठाकर सड़क के किनारे किया। बाद में गाय का उपचार किया गया। वहीं हादसे में कार क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि चालक को कोई नुकसान नहीं हुआ।

Pushpendra Rajput Reporting
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