मणिपाल प्रिंटिंग प्रेस से चोरी कर लीक किया एलआरडी पेपर

पेपर चुराने वाले तीन में से दो आरोपी गिरफ्तार,
मुख्य आरोपियों में से भी एक पकड़ा, दो के नाम का खुलासा

By: nagendra singh rathore

Published: 02 Jan 2019, 11:05 PM IST

अहमदाबाद. राज्य सरकार और पुलिस की मुसीबत बढ़ाने वाले गुजरात पुलिस लोकरक्षक दल (एलआरडी) भर्ती पेपर लीक मामले को आखिरकार पूरी तरह से सुलझाने का दावा डीजीपी शिवानंद झा ने किया है। कर्नाटक के उडुपी जिले के मणिपाल स्थित जिस प्रिंटिंग प्रेस में पेपर छपा था। उसी प्रिंटिंग प्रेस से पेपर चोरी होने के बाद लीक किया गया होने का दावा डीजीपी ने किया है। प्रिंटिंग प्रेस से पेपर को चोरी करने वाले तीन में से दो और मुख्य आरोपियों में से एक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य कई लोगों के नाम से भी पर्दा उठा है।
डीजीपी शिवानंद झा ने पेपर लीक होने के ठीक एक महीने बाद बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि गुजरात पुलिस ने एलआरडी पेपर लीक मामला सुलझा लिया है। हरियाणा सोनीपत निवासी विनय रमेश अरोरा, कर्नाटक के बीदर जिले के प्रतापनगर निवासी महादेव दत्तात्रेय अस्तुरे और कर्नाटक के बीदर जिले के नौबाद निवासी विनोद बंसीलाल राठौड़ को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले गुजरात पुलिस 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इन तीन के साथ 16 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
खिड़की की ग्रिल तोड़ी, प्रिंर्टिग प्रेस में लापरवाही पड़ी भारी
विनय अरोरा पेपर लीक करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपियों में से एक है, जबकि महादेव अस्तुरे और विनोद राठौड़ २० नवंबर की रात को मणिपाल की प्रिटिंग प्रेस से पेपर चोरी करने वाले तीन आरोपियों में से हैं। इनके साथ एक और मेहमूद नाम का आरोपी भी २० नवंबर की मध्यरात्रि बाद प्रिटिंग प्रेस के पिछले हिस्से की दीवार को कूदकर परिसर में घुसा। महादेव, विनोद, मेहमूद तीनों ने प्रिटिंग प्रेस के कमरे में लगी खिड़की की ग्रिल काटकर प्रवेश किया। वहां एलआरडी भर्ती का प्रिंटेड खामीयुक्त पेपर पड़ा था, जिसे दरअसल प्रिटिंग प्रेस के कर्मचारियों ने नष्ट करने के लिए निकाला था, लेकिन नष्ट नहीं किया गया। कर्मचारियों की यह लापरवाही मूल कारण बनीं। विनोद के हाथ यह पेपर लग गया। उसने फोटो खींचा और फिर वह खामीयुक्त पेपर भी ले लिया। तीनों ही फिर खिड़की की ग्रिल को जस की तस लगाकर बाहर निकल आए। प्रेस के इस हिस्से में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था, जिससे यह घटना उसमें कैद नहीं हुई।

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