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कोरोना महामारी के बाद बच्चों की थाली हुई फीकी, ये व्यंजन हुए गायब, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

Gujarat, post covid, reduced nutritious food, lost family member -देश में 12 फीसदी बच्चों से हुआ दूर पौष्टिक भोजन, गुजरात में 29 फीसदी बच्चों को दूध-दाल-सब्जी नसीब नहीं हो पा रही है

अहमदाबाद

Published: May 06, 2022 10:00:46 pm

अहमदाबाद. गुजरात सहित देशभर में कोरोना का संक्रमण बेशक अब काबू में गया हो, लेकिन उसका असर अभी भी बरकरार है। कोरोना महामारी के बाद देश में 12 फीसदी बच्चों की थाली से दूध-दाल, सब्जी, अंडे, मीट व मछली जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ गायब हो गए हैं। गुजरात में 29 फीसदी बच्चों को दूध-दाल-सब्जी नसीब नहीं हो पा रही है।
यह तथ्य शिक्षा व कौशल शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले ट्रस्ट क्वेस्ट अलायंस की ओर से 10 राज्यों में किए गए पोस्ट कोविड सर्वे में सामने आए हैं। इसमें सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 22575 स्कूली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिसमें से गुजरात से 4184 बच्चे शामिल हुए। 2021 में यह सर्वे आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, ओडीशा, पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना में किया गया। जिसमें सरकारी स्कूलों के कक्षा 8 से 10वीं के विद्यार्थियों को शामिल किया गया।
यह सर्वे रिपोर्ट और पाथवे टू वर्क मैपिंग एजूकेशन, स्किल्स एंड एम्पलॉयबिलिटी टू लेबर मार्केट डिमांड सर्वे रिपोर्ट को शुक्रवार को अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन आयोजित क्वेस्ट टू समिट में जारी किया गया।
क्वेस्ट एलाइंस के सीईओ आकाश शेठी और स्कूल प्रोग्राम की निदेशक नेहा पार्थी ने बताया कि सर्वे में शामिल बच्चों में से 13893 विद्यार्थियों ने जवाब दिया। इनमें से 12 फीसदी ने कहा कि उनकी थाली से दूध-दाल-सब्जियां, अंडे-मीट,मछली गायब हुई हैं। 33 फीसदी विद्यार्थियों का कहना था कि चूंकि कोरोना महामारी में उनके सिर से परिजनों का साया उठ गया इसके चलते उनका खानपान प्रभावित हुआ है। गुजरात में यह संख्या 29 फीसदी है। जबकि सर्वाधिक 57 फीसदी बच्चे ओडिशा के हैं, जिनकी थाली से पौष्टिक खाना गायब हो गया है।

छात्राओं से ज्यादा छात्रों को जल्द विवाह होने का डर
सर्वे में यह भी सामने आया कि 7.02 प्रतिशत बच्चों को इस बात का डर है कि उनके परिजन अब उनकी जल्द शादी कर देंगे। अमूमन छात्राओं की जल्द शादी की बात होती है लेकिन सर्वे में सामने आया कि गुजरात और असम में छात्राओं से ज्यादा छात्रों को उनकी जल्द शादी करने देने का डर है। गुजरात में 6.7 प्रतिशत छात्र जबकि 5 प्रतिशत छात्राओं को जल्द शादी कर देने का डर है। जबकि आसाम में 4.5 प्रतिशत छात्रों ने ऐसी चिंता जताई। छात्राओं ने नहीं जताई।

गुजरात के 40 फीसदी बच्चों को भावी शिक्षा की चिंता
सर्वे में यह भी सामने आया कि गुजरात के 40 फीसदी बच्चों को उनकी भावी शिक्षा की चिंता सता रही है। दूसरी लहर में देश में 10.4 फीसदी जबकि गुजरात में 49 फीसदी बच्चों ने अपने परिजनों को खोया है। इसके चलते उनकी आजीविका भी प्रभावित हुई है। गुजरात के 45 फीसदी बच्चों ने तनाव, चिंता का सामना करना पड़ रहा है जो अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है।
कोरोना महामारी के बाद बच्चों की थाली हुई फीकी, ये व्यंजन हुए गायब, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत
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