Gujarat: फीस को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के फेडरेशन से मांगा जवाब

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By: Uday Kumar Patel

Published: 05 Sep 2020, 12:01 AM IST

अहमदाबाद. कोरोना की महामारी के बीच निजी स्कूलों के फीस का मामला एक बार फिर गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा है। स्कूल संचालकों के साथ राज्य सरकार की दो बार की बैठक में कोई उचित समझौता नहीं हो सका। इसलिए अब राज्य सरकार फिर से हाईकोर्ट पहुंची है। मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ व न्यायाधीश जे बी पारडीवाला की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में निजी स्कूलों के फेडरेशन-फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूल- से अपना पक्ष लिखित रूप से हलफनामे के रूप में मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी।

राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि किसी तरह का व्यावहारिक समझौता नहीं होने के कारण अब फीस के मुद्दे पर नए सिरे से किसी प्रकार के परिपत्र करने में सक्षम नहीं है। इसलिए अब हाईकोर्ट खुद इस मुद्दे पर जरूरी दिशानिर्देश जारी करे।
गत महीने हाईकोर्ट ने कोरोना के दौर में राज्य सरकार की ओर से वास्तविक रूप से स्कूल नहीं खुलने तक निजी स्कूलों को फीस नहीं लेने के पारित को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार को स्कूल संचालकों के साथ से इस मुद्दे पर संतुलन बिठाकर इसका समाधान करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार से फीस के मुद्दे पर फिर से नया प्रस्ताव जारी करने को कहा था, लेकिन समझौता नहीं होने के कारण राज्य सरकार को एक बार फिर हाईकोर्ट आना पड़ रहा है।

राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री ने फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस स्कूल्स के प्रेसिडेेंट व अन्य पदाधिकारियों को गत 17 अगस्त को बैठक आयोजित की थी। इसमें स्कूलों को कोरोना की वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए ट्यूशन फीस में 25 फीसदी कमी करने व अन्य फीस नहीं लेने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि फेडरेशन का यह कहना था कि अभिभावकों की आर्थिक स्थिति का केस दर केस मूल्यांकन कर फीस घटाएंगे। साथ ही फेडरेशन ने अन्य फीस माफ नहीं करने का रूख भी अपनाया था। इसके बाद फिर गत 20 अगस्त को बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भी फेडरेशन की ओर से पहले जैसा ही जवाब दिया गया। स्कूलों की ओर से यह भी कहा गया कि अभिभावकों को कोरोना में आर्थिक मुश्किलें होंगी तो ऐसे केस देखकर फीस में दस से सौ फीसदी तक माफी की जाएगी। उधर राज्य सरकार का कहना है कि कोरोना की परिस्थिति को देखते हुए जब तक प्रत्यक्ष रूप से स्कूल नहीं खुल जाते तब तक ट्यूशन फीस में 25 फीसदी माफी व अन्य फीस नहीं लेने का प्रस्ताव रखा गया।

Uday Kumar Patel Reporting
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