Gujarat: टोसिलजुमैब इंजेक्शन की कालाबाजारी के खिलाफ कड़़ी कार्रवाई करें : हाईकोर्ट

Gujarat, Tocilzumab injection, black marketing, high court, Corona

By: Uday Kumar Patel

Published: 24 Jul 2020, 10:39 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना से जु़ड़़े मामलों के तहत निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के जीवन उपयोगी के रूप में काम में आने वाले टोसिलजुमैब इंजेक्शन में सब्सिडी दिए जाने की मांग के साथ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि टोसिलजुमैब इंजेक्शन का काला बाजार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के इस इंजेक्शन की कालाबाजारी नहीं कर सकने के लिए विशेष सिस्टम की व्यवस्था की जाए। यदि संभव हो तो केन्द्रीकृत वितरण व्यवस्था खड़़ी करनी चाहिए जिससे ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठे और इंजेक्शन की सभी जिम्मेवारी एक ही अथॉरिटी के पास रहे।

वकील रूषांग मेहता की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार ने मौखिक जवाब के प्रत्युत्तर में याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से पेश किएगए इंजेक्शन के आंकड़े और सच्चे आंकड़े अलग-अलग हैं। अहमदाबाद महानगरपालिका ने कोई निश्चित डाटा पेश नहीं किया है। यह इंजेक्शन जिंदगी बचाने वाली है और संभव हो उतना जल्द मरीज को गंभीर परिस्थिति में यह मिलनी चाहिए। लेकिन इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी है। चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन, समिति की मंजूरी के बाद यह इंजेक्शन मिलता है जिसमें 48 घंटे लग जाते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि टोसिलजुमैब का एक इंजेक्शन की कीमत 35 से 40 हजार रुपए के बीच है। राज्य सरकार ने 250 इंजेक्शन लिए हैं इनमे से 210 इंजेक्शन सरकारी व महानगरपालिका संचालित अस्पतालों के लिए रखे गए हैं जिसे मरीजों को बिना शुल्क दिया जाता है। जबकि 40 इंजेक्शन निजी अस्पतालों को दिया गया है, लेकिन निजी अस्पतालों में कोरोना के उपचार के लिए दाखिल मरीजों से अंकित दाम के तहत चार्ज लिया जाता है जो कोरोना के प्रति सरकार की भेदभाव की नीति दर्शाती है।

Uday Kumar Patel Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned