जीयू में अब सेंट्रलाइज्ड नहीं होंगे पीजी के एडमीशन

जीयू में अब सेंट्रलाइज्ड नहीं होंगे पीजी के एडमीशन

Nagendra rathor | Publish: Feb, 15 2018 11:07:26 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

सिंडीकेट की बैठक में छह करोड़ के घाटे वाला बजट पारित

अहमदाबाद. गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) में जून-२०१८ से शुरू होने जा रहे नए शैक्षणिक वर्ष में पोस्ट ग्रेजुएट (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रमों में अब विवि की ओर से केन्द्रीय पद्धति के जरिए प्रवेश नहीं दिए जाएंगे।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा, लेकिन प्रवेश संबंधित भवन-कॉलेज देंगे। स्नातक पाठ्यक्रमों (यूजी) में भी केन्द्रीय पद्धति से प्रवेश की पद्धति को रद्द किया जाए या नहीं इस पर विचार किया जाएगा।

गुरुवार को जीयू में हुई अकादमिक परिषद (एसी) और एक्जीक्यूटिव काउंसिल (सिंडीकेट-ईसी) की बैठक में यह निर्णय किया गया।
कुलपति डॉ. हिमांशु पंड्या ने बताया कि केन्द्रीय पद्धति से प्रवेश देने के चलते विवि प्रशासन का ज्यादातर समय प्रवेश देने में ही हो जाता था। दो से तीन चरण की प्रवेश प्रक्रिया करने के चलते शैक्षणिक कार्य भी शुरू होने में देरी होती थी, जिसके चलते परीक्षा और परिणाम में भी समय ज्यादा लगता था।

ऐसी स्थिति इस साल ना हो इसके लिए पीजी पाठ्यक्रमों में जून-२०१८ से केन्द्रीय प्रवेश पद्धति को रद्द कर दिया है। हालांकि विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होगा। उन्हें अब संबंधित कोर्स के भवनों और कॉलेजों में जाकर प्रवेश के लिए फॉर्म भरना होगा।

यदि वह एक से ज्यादा कॉलेज में प्रवेश के लिए भाग्य आजमाना चाहते हैं तो सभी कॉलेजों में आवेदन करना होगा। स्नातक कोर्स में भी केन्द्रीय प्रवेश पद्धति को रद्द करने पर विचार किया जाएगा। इसके लिए एक समिति गठित की जा रही है।

डॉ. पंड्या ने बताया कि पीजी पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम बरकरार रहेगी, लेकिन स्नातक पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर सिस्टम को रद्द किया जाए या उसमें बदलाव किया जाए इसको लेकर विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, प्राचार्यों से विचार विमर्श किया जाएगा। इस निर्णय से सरकार को अवगत कराया जाएगा।

छह करोड़ के घाटे का बजट पारित
जीयू की सिंडीकेट की बैठक में वर्ष २०१८-१९ का छह करोड़ के घाटे का बजट पेश किया गया। वर्ष २०१८-१९ में एक अरब 21 करोड़ ८२ लाख रुपए की आय के सामने एक अरब २७ करोड़ ८९ लाख रुपए के खर्च का बजट पारित किया गया। इसमें जीयू के सभी कर्मचारियों के वेतन व भत्ते पर ८.६० प्रतिशत खर्च का अनुमान व्यक्त किया गया है। जबकि १८-४१ प्रतिशत खर्च परीक्षा कार्य का है।

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