इस जाने माने Industrialist ने Gujarat Vidyapith के विद्यार्थियों से कही यह बात

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अहमदाबाद. परिश्रम व समर्पण की भावना बिना कुछ भी प्राप्त करना संभव नहीं है। निरंतर प्रयास व परिश्रम से कोई भी कार्य संभव है। मंगलवार को गुजरात विद्यापीठ के 66वीं दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि पद से जाने-माने उद्योगपति अजीम प्रेमजी ने यह बातें कहीं।
विद्यापीठ परिसर में आयोजित इस समारोह में उन्होंने कहा कि उनके विचारों और कार्यों पर उनकी माता के बाद सबसे ज्यादा प्रभाव महात्मा गांधी का रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके पांच विभिन्न मुद्दों में गांधी विचार की प्रासंगकिता व अनिवार्यता समझाई।
इस अवसर पर कुलपति इलाबेन भट्ट ने विद्यार्थियों से कहा कि वे सभी ज्ञान की दुनिया से कर्म की दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। कर्म भविष्य की $घड़़ी है। हम यह जानते हैं कि काम की दुनिया त्वरित रूप से बदल रही है। बदलती दुनिया के संबंध में जानना व समझना जरूरी है। गांधी विचार आज भी प्रासंगिक है।इस अवसर पर कुलनायक अनामिक शाह ने विद्यापीठ के बीते वर्ष का रिपोर्ट पेश किया। दीक्षांत समारोह में औपचारिक शिक्षा के तहत 27 पीएचडी, 25 एम. फिल, 355 अनुस्नातक, 204 स्नातक व 77 अनुस्नातक डिप्लोमा धारकों को उपाधि प्रदान की गई।
वर्ष 2019 का महादेव देसाई समाज सेवा पुरस्कार के रूप में तरलाबेन बाबूभाई शाह का चयन किया गया है। वे फिलहाल वेडछी प्रदेश सेवा समिति की प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

Uday Kumar Patel
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