gujrat: देशभर में सबसे कम बेरोजगार हैं गुजरात मेंं

gujrat news, chief minister, employment,, industry, MSME : 3.4 फीसदी बेरोजगारी दर के साथ रोजगार देने में गुजरात अव्वल

By: Pushpendra Rajput

Published: 26 Jun 2020, 08:24 PM IST

गांधीनगर. गुजरात (Gujarat) सबसे कम 3.4 फीसदी बेरोजगारी  (unemployment) दर के साथ देशभर में रोजगार मुहैया कराने के मामले में आगे रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पीरिओडिक लेबर फोर्स सर्वे (Survey की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (Chief minister) के दिशानिर्देश में राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र सहित अन्य उद्योगों को राज्य सरकार के प्रोत्साहन, सरल नीतियां, त्वरित ऋण सहायता, श्रम सुधारों और उद्योग स्थापना में सरलता के चलते राज्य में ज्यादा उद्योगों के आने के कारण इस वर्ष यह बेरोजगारी दर गत वर्ष के 4.5 फीसदी से भी घटकर 3.4 फीसदी हो गई है। यह गुजरात की एक विशिष्ट उपलब्धि है।
यह सर्वे भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से किया गया है। सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 15 से 59 वर्ष के आयु समूह में गुजरात देश में सबसे कम 3.4 फीसदी बेरोजगारी दर के साथ पहले स्थान पर है। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि गुजरात ने इस बार अपने ही गत वर्ष के सबसे कम बेरोजगारी दर के रिकार्ड को तोड़ा है। इसी सर्वे के अनुसार गत वर्ष गुजरात 4.5 फीसदी की सबसे कम बेरोजगारी दर के साथ देश में अव्वल था।
बेरोजगारी दर के मामले में गुजरात की तुलना में अन्य बड़े राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक में बेरोजगारी की दर 5.3 फीसदी, महाराष्ट्र में 6.6, तमिलनाडु में 7.2, आंध्र प्रदेश में 7.8, हरियाणा में 9, केरल में 11 और तेलंगाना में 11.5 फीसदी है।

 रोजगार के दावों की हकीकत बताए राज्य सरकार : कांग्रेस

गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने पीरीयोडिक लेबर फोर्स के सर्वे के आधार रोजगार के दावे करने पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि गुजरात में सरकारी और निजी रोजगार, वाइब्रेन्ट उत्सवों में अरबों रुपए के पूंजी निवेश पर लाखों को रोजगार देने के दावों की हकीकत को राज्य सरकार घोषित करे। उन्होंने कहा कि पीरीयोडिक लेबर फोर्स के सर्वे जुलाई 2018 से जुलाई 2019 की समयावधि में 1, 01,579 आवासों में 4, 20, 757 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 55 हजार 812 घरों के 2,39,817 लोगों और शहरों में 45 हजार 767 घरों के 1,80,940 लोगों को शामिल किया गया। मतलब कि देश के 135 करोड़ जनसंख्या में सिर्फ 4,20,757 लोगों का सर्वे किया, जो सिर्फ श्रमिकों के लिए है। इसके बावजूद राज्य सरकार रोजगार के दावे कर रही है, जो कहां तक उचित है। सर्वे श्रमिकों को न्यूनतम रोजगार का सैम्पल सर्वे होता है वहां रोजगार में अव्वल का दावा करना कहां तक उचित है।

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Pushpendra Rajput Reporting
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