हार्दिक की याचिका खारिज, राज्य सरकार की दलीलें मान्य रखी

-विधायक कार्यालय तोडफोड़-आगजनी प्रकरण में दोषी ठहराए जाने को स्थगित करने की लगाई थी गुहार

By: Uday Kumar Patel

Published: 29 Mar 2019, 07:48 PM IST

 

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने हार्दिक पटेल की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। लोकसभा चुनाव लडऩे के लिए पाटीदार नेता से बने कांग्रेस नेता हार्दिक की ओर से विधायक कार्यालय तोडफ़ोड़-आगजनी प्रकरण में दोषी ठहराए जाने पर रोक की याचिका खारिज कर दी।

न्यायाधीश ए. जी. उरेजी ने अपने फैसले में राज्य सरकार की दलीलों को मान्य रखा। राज्य सरकार ने हार्दिक की याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कहा था कि हार्दिक की पृष्ठभूमि आपराधिक है और उसके खिलाफ राजद्रोह के दो मामलों के साथ-साथ 17 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। लोगों की सेवा करने के लिए विधायक व सांसद जैसे लोक प्रतिनिधि बनने की जरूरत नहीं है। महात्मा गांधी कभी चुनाव नहीं लड़े तो भी वे देश के राष्ट्रपिता बने। सामाजिक प्रतिनिधि होने और लोकसभा का चुनाव लडऩे होने के कारण किसी को दोषी ठहराए जाने को स्थगित नहीं किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार के महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी की ओर से यह भी दलील दी गई थी कि लोकतंत्र में सार्वजनिक जीवन में आने वाले लोगों को स्वच्छ छवि का होना चाहिए। ऐसे लोग लोग जनप्रतिनिधित्व करें तो यह लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। कानून तोडऩे वाले को कानून बनाने वाला कैसे बनाया जा सकता है? इसलिए हार्दिक चुनाव लडऩे के लिए फिट नहीं है। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराया जाए तो ऐसे में असाधारण परिस्थिति में ही रोक लगाई जानी चाहिए। रोक लगाने से पहले सभी मुद्दों को ध्यान में लेना चाहिए। आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हार्दिक पटेल ने तोडफ़ोड़ और आगजनी प्रकरण में उन्हें 2 वर्ष की सजा के लिए दोषी ठहराए जाने पर रोक लगाने की गुहार लगाते हुए याचिका दायर क थी जिससे वे लोकसभा का चुनाव लड़ सके।

Uday Kumar Patel Reporting
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