कोरोना की संभावित तीसरी लहर का मुकाबला हर्ड इम्युनिटी से संभव

70 फीसदी को टीका लगे तो डवलेप होगी हर्ड इम्युनिटी

विशेषज्ञों का मत, टीकाकरण की गति को बढऩा अति आवश्यक

 

By: Omprakash Sharma

Published: 13 May 2021, 10:17 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए 70 फीसदी हर्ड इम्युनिटी का होना जरूरी है। इसे टीकाकरण से भी हासिल किया जा सकता है। यदि देश में प्रतिमाह 20 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जाए तो इस लक्ष्य को हांसिल किया जा सकता है। हाल में टीकाकरण की गति काफी धीमी है। इस तरह की गति से वैक्सीन को मॉटीफाइड करने की भी नौबत आ सकती है क्योंकि बार-बार कोरोना का वायरस स्वरूप बदल रहा है।
कोरोना की पहली, दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर आने की आशंकाओं ने जोर पकड़ा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टीकाकरण से हर्ड इम्युनिटी हासिल होती है तो तीसरी लहर का सामना करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। हालांकि इसके लिए कम से कम 70 फीसदी लोगों को वैक्सीनेशन में शामिल करना होगा। गुजरात की बात की जाए तो गत 16 जनवरी के बाद से अब तक 1.36 करोड़ के आसपास लोगों को वैक्सीन लगी है। इसमें भी आधे लोग भी दूसरा डोज नहीं ले पाए हैं। राज्य में मुश्किल से 20 फीसदी लोगों का टीकाकरण हुआ है, जो समय को देखते हुए बहुत कम हैं। यदि 70 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग जाए तो हर्ड इम्युनिटी से संभवित संकट से निपटा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा संक्रमण फैलने पर भी हर्ड इम्युनिटी डवलेप होती है। लेकिन यह विकल्प काफी खतरनाक है, इसमें लोगों की मौत होना का खतरा बना रहता है।

भारत में तीसरी लहर से इनकार नहीं किया जा सकता

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की गुजरात इकाई के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. चंद्रेंश जरदोश का मानना है कि कोरोना की की तीसरी लहर जिस तरह से विश्व के कई देशों में आई है उससे लगता है कि भारत में भी इसका आना लगभग तय है। इस लहर से आने से पहले यदि देश में 70 फीसदी हर्ड इम्युनिटी डवलेप कर ली जाती है तो कोरोना का असर ज्यादा नहीं हो सकता है। लेकिन यदि चूक होती है तो इसके परिणाम खतरनाक भी हो सकते हैं। इसके लिए देश में प्रतिमाह कम से कम 20 करोड़ टीकों की जरूरत है। डॉ. जरदोश का कहना है कि 16 जनवरी से अब तक देश में लगभग 16 करोड़ ही टीके लग पाए हैं। लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैक्सीन कंपनियों को देश हित में आगे आना होगा । भारतीय कंपनियों के लिए बीस करोड़ प्रति माह वैक्सीन का निर्माण करना बड़ी बात नहीं है।
डॉ. जरदोश ने बताया कि 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए वैक्सीन की प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए।

थर्ड वेव में बच्चों के संक्रमित होने की भी आशंका

कोरोना की पहली लहर में बच्चों के संक्रमित होने की घटनाएं सामने नहीं आईं थीं। दूसरी लहर में कुछ बच्चों के संक्रमित होने के मामले सामने आए थे। संभावित तीसरी लहर में बच्चों के लिए भी यह संक्रमण खतरनाक साबित हो रहा है, क्योकि हर बार इसका स्वरूप बदलता रहता है। यदि बच्चे संक्रमित होंगे तो उनके साथ उनके अभिभावकों को रहने की मजबूरी होगी। ऐसे में संक्रमण बढऩे का खतरा ज्यादा हो जाएगा। इसके लिए हर्ड इम्युनिटी डवलेप होना जरूरी है।
डॉ. प्रवीण गर्ग, सीनियर फिजिशियन अहमदाबाद

Omprakash Sharma Reporting
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