गुजरात में भी थमे ट्रकों के पहिया

ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 20 Jul 2018, 11:05 PM IST

गुजरात. ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की ओर से डीजल की बढ़ती कीमत, टोल टैक्स, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की बढ़ती दर सहित लम्बित मांगों को लेकर शुक्रवार से शुरू की गई ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर गुजरात में भी दिखाई दिया। अहमदाबाद से लेकर राजकोट, जामनगर, आणंद व खेड़ा सहित प्रदेशभर में शुक्रवार को ट्रकों के पहिया धम गए। ट्रक ऑपरेटरों ने जगह-जगह प्रदर्शन करते हुए सरकार से विरुद्ध रोष व्यक्त किया।


ट्रासपोर्ट की ९०० ऑफिस बंद
राजकोट. हड़ताल के चलते राजकोट में ट्रांसपोर्ट की ९०० ऑफिसें बंद रही, तो सौराष्ट्र-कच्छ के ३ लाख ट्रक खड़े रह गए।
राजकोट गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के बैनर तले सुबह से ही ट्रांसपोर्टर बंद के ऐलान में जुड़े। बंद के चलते शहर के कुवाडवा रोड एवं गोंडल रोड पर कंट्रोल रूम कार्यरत हुआ है। दोनों स्थलों पर ट्रांसपोर्टरों की भीड़ रही। एसोसिएशन के अध्यक्ष हसमुख भगदेव के अनुसार आंदोलन में दूध एवं सब्जी सहित दैनिक आवश्यक वस्तुओं के मालवाहकों को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन आलू-प्याज के ट्रकों को बंद रखा गया है। इस हड़ताल को निजी ट्रैवल्स ऑपरेटरों ने भी समर्थन घोषित किया है, जिसके चलते प्रदेशभर में निजी बसें भी बंद रही। हड़ताल के चलते हाईवे के दोनों ओर ट्रकों की लम्बी लाइनें देखने को मिली।


हालार में २३ हजार ट्रक जुड़े हड़ताल में
जामनगर. हालार (जामनगर एवं देवभूमि द्वारका जिला) में भी २३ हजार से अधिक ट्रक ठहर गए। हड़ताल में निजी बस भी जुडऩे से एसटी बसों में यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। माल परिवहन भी ठप हो गया। विशेषकर स्थानीय स्तर पर बिल्डिंग मटेरियल की हेराफेरी बाधित रहने से उद्योग पर असर पड़ा। जामनगर के निजी बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजूभाई कनखरा ने बताया कि हड़तालमें निजी बस ऑपरेटर भी जुड़े हैं। इस प्रकार जामनगर से राजकोट, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, मुम्बई, नाथद्वार की करीब सवा सौ बसें बंद रही।


हाईवे पर ट्रकों की लम्बी लाइन
आणंद. आणंद वल्लभविद्यानगर में ट्रांसपोर्ट के संचालक भी हड़ताल से जुड़े। विठ्ठ उद्योगनगर जीआईडीसी में शुक्रवार को माल-सामान की हेराफेरी ठप रही। चिखोदरा चौकड़ी से सामरखा चौकड़ी तक हाईवे मार्ग के दोनों ओर ट्रकों की लम्बी लाइनें लग गई।
वल्लभविद्यानगर आणंद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन जैन ने बताया कि रोजाना डीजल के भाव तय करने के कारण ट्रांसपोर्ट संचालकों को किराया तय करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डीजल के भाव तीन या छह महीने में समीक्षा करके तय करने चाहिए।

Gyan Prakash Sharma
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