भारतीय उत्पादों के निर्यात पर अमरीका नहीं लगाएगा अतिरिक्त कर

indian product, export, america, tax, GNLU, professors, e-commerce: गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने निभाई अहम भूमिका

By: Pushpendra Rajput

Published: 10 Jun 2021, 09:16 PM IST

गांधीनगर. भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों पर अमरीका फिलहाल कोई भी अतिरिक्त कर नहीं लगाएगा। यह अतिरिक्त कर स्थगित कराने में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) ने अहम भूमिका निभाई है।
जिन देशों के भारत में स्थायी कार्यालय नहीं हैं ऐसे नॉन रेजिडेन्ट ई-कॉमर्स ऑपरेटर और डिजिटल कम्पनियों पर भारत ने 2 फीसदी डिजिटल सर्विस टैक्स लगाया था। इससे पूर्व ये कम्पनियां भारतीय बाजारों से काफी मुनाफा कमा रही थी, लेकिन इन कम्पनियों का भारत में कोई स्थायी कार्यालय नहीं होने से वे कर जमा कराने से बच रही थी। इसके चलते अमरीकी सरकार अर्थात् युनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रिजेन्टिव (यूएसटीआर) ने डिजिटल सर्विस टैक्स को अमरीकी डिजिटल कम्पनियों से भेदभाव करार दिया। बाद में यूएस (अमरीकी) सरकार ने भारत से अमरीका में निर्यात होने वाले झींगा, लकड़ी के फर्नीचर, सोना-चांदी के आभूषणों पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले अमरीकी कानून के मुताबिक व्यक्तियों और संस्थाओं से राय जानने के लिए सुनवाई की गई।
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) ने यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेन्टेटिव (यूएसटीआर) के समक्ष वच्र्युअल पब्लिक हियरिंग (जन सुनवाई) में भाग लिया। विदेशी डिजिटल कम्पनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने के भारत के निर्णय का मजबूती से पक्ष रखा। साथ ही भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाने के अमरीकी सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। इस सुनवाई में भारत से फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), जेम्स एंड ज्वेलरी एसोसिएशन, सीफूड एक्सपोर्ट्स के प्रतिनिधि भी थी। उन्होंने भी अमरीकी सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। इसके चलते अमरीकी सरकार ने भारतीयउत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाने का प्रस्ताव 180 दिनों के लिए स्थगित रखा। जीएनएलयू की ओर से पूर्व छात्र एवं गेस्ट फेकल्टी वरुण चाबलानी ने पेशकश की, जो नीदरलैण्ड में टैक्स प्रेक्टिशनर हैं। वरुण चाबलानी व सहायक प्रोफेसर सोहम वाजपाई ने इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया और सहायक प्रोफेसर हर्षा राजवंशी ने प्रोजेक्ट का संकलन किया।

Pushpendra Rajput Reporting
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