Ahmedabad News अहमदाबाद में कपिल ने बनाया था विश्व रिकॉर्ड और यहीं से लिया था संन्यास

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By: nagendra singh rathore

Published: 06 Jan 2020, 04:56 PM IST

उपेन्द्र शर्मा

अहमदाबाद. आज कपिल प्राजी का जन्मदिन है। एक इन्सान दुनिया में जो कुछ भी कर सकता है कपिल देव उसकी जीवन्त मिसाल है। यह वो दौर था जब दुनिया भारत को क्रिकेट ही नहीं बल्कि किसी भी क्षेत्र में फिसड्डी ही मानती थी। भारत को दुनिया भर में एक गरीब और लाचार देश ही माना जाता था। तब वो कपिल देव ही थे जिन्हें विश्वास था अपने बाजुओं की ताकत पर कि वे दैत्याकार और तब तक की अपराजित वेस्ट इंडीज की टीम को हराकर विश्व कप जीतेंगे।
पिछली 100 बरसों में अगर भारत के आत्म विश्वास को स्थापित करने का काम राजनीति में महात्मा गान्धी ने किया तो खेलों और जवानी के लिए वही काम कपिल देव ने किया। कपिल प्राजी के चेहरे की वो दिलकश हंसी, वो लहरदार बाल, वो खड़ी कॉलर, वो घनी मर्दाना मूंछे, वो दायें हाथ में घड़ी, वो जाट बलवान की देह और माथे में करंट ही तो भारत को यकीं दिलाते थे कि "तुम सिर्फ कुछ हो ही नहीं बल्कि सब कुछ हो"।
जब सचिन, सौरव, द्रविड़ सहवाग आए और उसके बाद धोनी, विराट, रोहित आए तो भारत पूरी दुनिया में छा चुका था लेकिन कपिल इन सब से बहुत पहले आए थे। जब आए थे इंग्लैण्ड, वेस्ट इंडीज और पाकिस्तान वालों ने हंसी उडाई थी कि भारत में सिर्फ स्पिनर पैदा होते हैं फास्ट बॉलर नहीं। तब कपिल अकेले थे लेकिन वो विरला था। हरियाणा हरिकेन और हर्क्युलिस था। जिस दिन क्रिकेट को अल्विदा कहा तो क्या फास्ट और क्या स्पिन। सबसे ज्यादा विकेट का रेकोर्ड इस जहां में उसी दिलदार के नाम था।
कपिल को क्रिकेट छोड़े करीब 26 बरस हो गए हैं। अहमदाबाद में श्रीलंका के खिलाफ उन्होने 1994 में अन्तिम टेस्ट मैच खेला था और 434 विकेट लेकर सर्वाधिक विकेट हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसीलिए मौजूदा जवानों को तो यह पता भी नहीं की मेरे पापा और उनके दादा जब मैच देखते थे तो कपिल के क्रीज पर आने पर वो ऐसे खुश होते थे मानों खुद खेल रहे हैं। अगर 4 गेंदों पर भी 4 छक्के भी चाहिये हों तब भी वो पीढ़ी कहती थी कपिल है बना ही देगा। और उस सिकन्दर ने बनाये भी।
यही कारण है कि 1978 (कपिल पदार्पण) से पहले भारत में इक्का-दुक्का लोगों के नाम कपिल मिलेंगे और उसके बाद लाखों बच्चों के नाम कपिल रखे गए। हमारे घर में भी 1989 में एक सुदर्शन कपिल जन्मा था। उस दौर की लाखों स्त्रियों ने जीवन तो अपने पतियों के साथ ही बिताया लेकिन बेटा कपिल सरीखा ही चाहा।
आजकल कुछ जवानों के परीक्षा में नम्बर कम आ जाते हैं तो फांसी खा मरते हैं। उन्हें सीखना चाहिये कि जब तक सांस है तब तक आस है। कपिल चूंकि ग्रमीण पृष्ठभूमि से थे तो उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। कपिल ने अंग्रेजी सीखी और अब वे ऐसी बोलते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि संभवत: कपिल से बेहतर अन्ग्रेजी कोई ब्रिटिश विद्वान भी नहीं बोल सकता। यह कपिल की जिजीविषा थी जो वे यह भी कर पाए।
लम्बे समय तक सन्तान सुख हासिल ना होने पर कपिल ने परखनली शिशु तकनीक को अपनाया और एक पुत्री के पिता बने। भारत में आज भी इस विषय में लोग ज्यादा आगे नहीं आते हैं लेकिन कपिल का तो काम ही था लोगों को राह दिखाना।
इन दिनों निष्णात फिल्म निर्देशक कबीर खान '83' नाम से कपिल के जीवन पर फिल्म बना रहे हैं और उम्दा अभिनेता रणवीर सिंह इसमें कपिल प्राजी की भूमिका निभा रहे हैं। कबीर, रणवीर का ट्रेक रिकॉर्ड और कपिल देव की मशहूरियत यह कहते हैं कि फिल्म सुपर हिट होगी।
मैं किसी खिलाड़ी से कपिल की तुलना नहीं करना चाहता भले ही उसे भारत रत्न मिला हो या कुछ और... पर इतना कहना चाहता हूं कि कपिल सदियों में पैदा होता है और सिर्फ एक।

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nagendra singh rathore
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