भारतीय विधि प्रणाली और स्मृति शास्त्र पर बनेगा नया डिप्लोमा पाठ्यक्रम

legal system, diploma, GNLU, university, workshop, Gandhinagar: श्री सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी और जीएनएलयू में नए पाठ्यक्रम को लेकर कार्यशाला

By: Pushpendra Rajput

Updated: 29 Apr 2021, 08:23 AM IST

गांधीनगर. भारतीय विधि प्रणाली और स्मृति शास्त्र पर नया डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) और श्री सोमनाथ संस्कृति यूनिवर्सिटी की ओर से नए डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए दो दिवसीय कार्यशाला की गई। जीएनएलयू और श्री सोमनाथ यूनिवर्सिटी के बीच इस वर्ष जनवरी में इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए समझौता (एमओयू) हुआ था।

इस कार्यशाला में श्री सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. गोपबंधु मिश्रा, जीएनएलयू की एकेडेमिक अफेयर्स के डीन प्रोफेसर ममता बिस्वाल, जीएनएलयू के सेन्टर फोर लीगल हिस्ट्री, फिलोसॉफी एवं ट्रेडीशन की प्रमुख डॉ. ऋचा शर्मा, श्री सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी के प्राचार्य नरेन्द्र पंड्या और आचार्य वसंताचार्य, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट जोस वर्गिस और वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के धर्मशा के प्राध्यापक मीरा दुबे और जीएनएलयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजनीसिंह तोमर उपस्थित थे।
उत्तर व दक्षिण भारत की कानूनी परम्परा होगी शामिल

दो दिनों की कार्यशाला में एक वर्ष के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में तीन पेपर शामिल किए जाएंगे। भारतीय विधि इतिहास और साहित्य सर्वे के पेपर में रामायण, महाभारत, पुराण, वैदिक साहित्य, सूत्र साहित्य, स्मृति साहित्य, अनुवाद साहित्य एवं निबंध इत्यादि साहित्य की समीक्षा की जाएगी। साथ ही राजधर्म, राजा के अधिकार, स्रोत, महीदासा की फिलोसॉफी, उत्तर भारत एवं दक्षिण भारत की कानूनी परम्पराओं की ऐतिहासिक झांकी शामिल की जाएगी।

धर्मशास्त्र और अर्धशा विधि प्रणाली

इस पेपर में धर्मशा और अर्थशा आधारित भारत की प्राचीन विधि प्रणाली के संदर्भ में कानून व्यवस्था को शामिल किया जाएगा।

अपराध, सजा, साक्ष्य कानून

इस पेपर में प्राचीन भारत में फौजदारी न्याय के सिद्धांत एवं प्रशासन के साथ भारतीय अपराध संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।
सोमनाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. गोपबंधु मिश्रा ने कहा कि इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक कानून के साथ-साथ प्राचीन भारतीय शास्त्र में शामिल कानून और न्याय शास्त्र की परम्परागत पद्धति की जानकारी दी जाएगी।

जीएनएलयू के डीन डॉ. ममता बिस्वाल ने कहा कि भारतीय सर्वोच्च अदालत और विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसले में मौजूदा समय में भी धर्मशास्त्र , मनु स्मृति और अन्य प्राचीन ग्रंथ शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम में विधि छात्रों, प्राध्यापकों और एडवोकेट्स को अत्याधुनिक कानून व्यवस्था के साथ-साथ स्मृति शास्त्र को समझने की जानकारी मिलेगी।

Pushpendra Rajput Reporting
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