न शोरगुल न श्रद्धालुओं का रेला, ननिहाल में दर्शन दे गए जगन्नाथ

कोरोना के चलते लगा था कफ्र्यू, थोड़ी देर ही ठहरे थे

By: MOHIT SHARMA

Published: 12 Jul 2021, 11:28 PM IST

गांधीनगर. भगवान जगन्नाथ की ननिहाल सरसपुर में रथयात्रा को लेकर खासा उत्साह होता है। महीनों से श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के स्वागत को आतुर रहते हैं। एक सप्ताह पहले से ही उनकी ननिहाल सरसपुर की हर पोलों में भगवान के रथों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन बनाया जाता है। प्रसाद तैयार किया जाता है। भगवान जगन्नाथ के दर्शन को न सिर्फ अहमदाबाद बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग आते हैं।
इस वर्ष रथयात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का रेला नजर आता है। 'जय रणछोड़ माखणचोर’, जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी’ की गूंज नजर आती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। न तो शोरगुल नजर आया न ही श्रद्धालुओं का रैला नजर आया।

साढ़े तीन घंटे पहले पहुंचे रथ
सोमवार सुबह करीब सवा आठ बजे भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के रथ सरसपुर स्थित ननिहाल पहुंचे, जहां मामेरा की रस्म की गई। बाद में करीब 8.40 बजे फिर से रथ निज मंदिर के रवाना हो गए। हमेशा रथयात्रा पर सरसपुर में रथ 11.30 से 12.00 बजे तक पहुंचते हैं, लेकिन इस बार साढ़े तीन घंटे पहले ही पहुंच गए थे। कोरोना के चलते रथयात्रा मार्ग पर कफ्र्यू लगा गया था। इसके चलते हर रथयात्रा मार्ग पर पुलिस ने बैरीकैडिंग की थी। किसी को भी रथयात्रा में जाने की इजाजत नहीं थी। आमतौर पर हर रथयात्रा के दौरान से भीड़ से अटी रहने वाली छतें भी सुनसान नजर आ रही थीं। यहां तक कोई खिडक़ी और दरवाजा तक खुला नहीं था। चारों तरफ पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती थी। हालांकि रथों की रवानगी के बाद सरसपुर स्थित रणछोडऱाय मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। सोशल डिस्टेसिंग रखकर श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए।

MOHIT SHARMA
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