Ahmedabad News : 'कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मानसिक स्वस्थता बनाए रखना जरूरी'

मनोचिकित्सक व गुजरात साइक्रेटिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हिमांशु जे. देसाई ने लायंस क्लब डिस्ट्रिक्ट 3232 बी 1 की ओर से आयोजित हैल्थ वेबिनार में कहा

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 25 Aug 2020, 11:32 PM IST

अहमदाबाद. कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को मानसिक स्वस्थता बनाए रखना जरूरी है। कोरोना का भय एक प्रकार की बीमारी हो सकती है, उसके उपचार के लिए नियमित काउंसलिंग व दवाई लेनी पड़ सकती है। इससे बचने के लिए स्वयं के लिए, मित्रों, बच्चों व परिवार के लिए समय निकालकर कोरोना संबंधी भय को दूर करना और सामान्य जीवन जीना संभव है।
मनोचिकित्सक व गुजरात साइक्रेटिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हिमांशु जे. देसाई ने लायंस क्लब डिस्ट्रिक्ट 3232 बी 1 की ओर से हाल ही आयोजित हैल्थ वेबिनार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान नकारात्मक विचारों, चिंता, हताशा से बाहर निकलने के उपाय के लिए स्वयं को अपने पसंद के या किसी ना किसी काम में प्रवृत्त रखना चाहिए। स्वयं के लिए समय निकालकर शारीरिक व्यायाम करने चाहिए। इनमें चलना, दौडऩा, योग, प्राणायाम, जिम में जाकर कसरत करना आदि शारीरिक गतिविधि जारी रखनी चाहिए और शारीरिक तौर पर फिट रहना चाहिए।
इनके अलावा अपनी पसंद की प्रवृत्ति यानी चित्रकारी, संगीत, सुनना, बात करना आदि पर कुछ समय व्यतीत करना चाहिए। कोरोना महामारी के दौरान परिवार के लिए समय निकालने का अवसर मिला है, उसका उपयोग करना चाहिए, परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठकर विचारों का आदान-प्रदान करने से एक प्रकार का भय कम हो सकता है।

बच्चों के साथ समय व्यतीत करें

बच्चों के समय व्यतीत करने के बारे में, उनके साथ बैठकर उनके वर्तन के बारे में माता-पिता को विचार करना चाहिए। मोबाइल का उपयोग करने, पढऩे, मित्रों के साथ खेलने का समय पहले तय था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण घर से बाहर निकलने की सीमा तय कर दी है। पढऩे के समय बच्चे को परेशान नहीं करना चाहिए, खेलने का, मोबाइल फोन का उपयोग करने का समय तय करना चाहिए।

बड़ी उम्र के लोग नकारात्मकता दूर करें

बड़े लोग यानी बड़ी उम्र के लोग कसरत करें, स्वयं के लिए समय निकालें, ऐसी प्रवृत्तियां करें जिनसे मन तरोताजा हो, मित्रों से संपर्क में रहें तो नकारात्मकता दूर होगी और नई ताकत मिलेगी, जिससे कोरोना महामारी के दौरान समय आसानी से व्यतीत हो सकेगा। कोरोना महामारी के समय के बारे में भूतकाल में किसी ने सोचा भी नहीं होगा, ऐसे समय से सभी लोग निकल रहे हैं। मन में धैर्य रखना अत्यंत आवश्यक है। आंख-कान-नाक खुले रखकर शक्तियों का उपयोग करना चाहिए। शांति व ज्ञान से समय व्यतीत करने पर जागरुकता बढ़ाना संभव है।

180 डिग्री उल्टी हो गई जिंदगी

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत के पहले सभी लोगों की जिंदगी अलग थी। इसके बाद लोगों की जिंदगी 180 डिग्री उल्टी हो गई। कई लोगों की मानसिक हालत बिगड़ गई। कई लोग चिंता में आ गए। अनेक रोगी कोरोना वायरस के संक्रमण के विचार के बाद मानसिक रोग विशेषज्ञों से संपर्क करने लगे हैं। यानी कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बजाए कोरोना का भय लोगों को हैरान, परेशान करता है। कई लोग कोरोना होने बाद की स्थिति का विचार करते हैं।

कोरोना से मौत नहीं होने वाली, भय से भयभीत हो रहे लोग

डॉ. देसाई ने कहा कि कोरोना से लोगों की मौत होने वाली नहीं, लेकिन कोरोना के भय से लोग भयभीत हो रहे हैं। कई लोग घर से बाहर जाना चाहते हैं, अन्य लोगों से मिलना चाहते हैं लेकिन कोरोना के भय के कारण परिवारों के सदस्य ऐसा नहीं करने देते। कोरोना का भय लोगों को परेशान कर रहा है। भय के कारण चिंता से हृदय की धड़कन बढ़ती है, पसीना आता है, डर लगता है, पेट में गड़बड़ी महससू होती है, बार-बार पेशाब करने के लिए जाना पड़ता है। सामान्य स्थिति में ऐसे लक्षणों को चिंता कहा जाता है। कुछ भी नहीं होने के बावजूद मन में कुछ विचार आना, कुछ भी अच्छा नहीं लगना, हृदय की धड़कन बढऩे को चिंता रोग के लक्षण माना जाता है। चिंता रोग होने पर चिकित्सक की मदद लेनी पड़ती है।

हताशा में बदलती है चिंता

उन्होंने कहा कि इसके अलावा हताशा यानी डिप्रेशन में किसी प्रकार की पूर्व स्थिति में बदलाव आना, पहले की भांति किसी काम में आनंद नहीं आना, मन उदास या बेचेन रहना, नींद नहीं आना, सवेरे जल्दी नींद खुलना, काम-काज में मन नहीं लगना, भविष्य के लिए कोई आशा नहीं रहना, जीने की इच्छा कम होना आदि हताशा के लक्षण माने जाते हैं। सामान्यतया इनमें से पांच लक्षण यदि 15 दिन तक रहें तो हताशा कही जाती है। हताशा व चिंता अलग-अलग रोग हैं। कोरोना महामारी के दौरान मस्तिष्क में एक प्रकार की चिंता शुरू होती है और आगे चलकर यह चिंता ही हताशा में बदलती है। हताशा के अन्य कई कारण होते हैं इनमें कारोबार, रोजगार आदि से हताश होती है। कुल मिलाकर छोटे-बड़े सभी प्रकार के लोग एक प्रकार की हताशा या चिंता के शिकार हो रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान चिंता व हताशा होने पर आस-पास के चिकित्सक या मनोचिकित्सक या मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर ऐसे विचार आने के संबंध में बात करनी चाहिए।

डॉ. देसाई ने कहा कि मन में नकारात्मक विचार आने पर उन्हें दूर करने के लिए उपाय करना संभव है। नकारात्मक विचार भी कई प्रकार के होते हैं। एक बार नकारात्मक विचार आने की शुरुआत होने के बाद कई प्रकार के नकारात्मक विचार आने लगते हैं, यहां तक कि जीवन समाप्त करने के विचार भी आते हैं। इनसे बाहर निकलने के लिए सबसे पहले तो व्यक्ति को ही तय करना होगा कि उसे नकारात्मक विचारों से बाहर निकलना है।

Rajesh Bhatnagar
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