माइका में ५० फीसदी छात्राओं ने पाया प्रवेश

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By: nagendra singh rathore

Published: 22 Jul 2021, 08:32 PM IST

अहमदाबाद. माइका अहमदाबाद में प्रबंधन के गुर सीखने के लिए इस वर्ष ( बैच २०२१-२३) प्रवेश पाने वालों में छात्राओं की संख्या ५० फीसदी (४९.७२ प्रतिशत) है। बीते साल (२०२०-२२) से तुलना करेंं तो छात्राओं की संख्या में ५.८३ फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। बीते वर्ष २०२०-२2 के बैच में ५५.५५ फीसदी छात्राओं ने प्रवेश पाया था, जो बीते छह सालों में सर्वाधिक थी। बीते छह सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष संस्थान में छात्र और छात्राओं ने बराबर संख्या में प्रवेश पाया है। अमूमन तीन से चार प्रतिशत का उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।
माइका के अनुसार पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम और पीजीडीएम-सी) के २०२१-२३ बैच में १८३ विद्यार्थियों प्रवेश पाया है। जिसमें ९२ छात्र हैं, जबकि ९१ छात्राएं हैं। ८० फीसदी विद्यार्थियों की आयु २१-२५ साल है। ५५ फीसदी को पहले काम करने का अनुभव है, जबकि ४५ फीसदी ऐसे हैं जो कॉलेज से पास होकर सीधे यहां पहुंचे हैं।
राज्यों की बात करें तो १८३ विद्यार्थियों में सर्वाधिक ४७ महाराष्ट्र के हैं जबकि दिल्ली के २१, पश्चिम बंगाल के 2०, गुजरात के १८, उत्तरप्रदेश के १४ और हरियाणा के १० विद्यार्थियों ने इस वर्ष माइका के पीजीपी कोर्स में प्रवेश लिया है।
माइका के अनुसार इस वर्ष पहली बार फार्मा पृष्ठभूमि के विद्यार्थी ने प्रवेश लिया है। इसके अलावा आर्किटेक्ट, फैशन टेक्नोलॉजी और होटल मैनेजमेंट पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों ने भी प्रवेश पाया है। जिससे संस्थान में डिजाइन पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई है।
माइका के अध्यक्ष एवं निदेशक डॉ.शैलेन्द्रराज मेहता ने कहा कि माइका में प्रवेश संस्थान की प्रवेश परीक्षा के आधार पर बनाई गई मेरिट के तहत दिए जाते हैं। बावजूद इसके संस्थान में बहुविध संकाय और क्षेत्रों में काम का अनुभव पाने वाले विद्यार्थी प्रवेश पाते हैं। इससे सीखने का माहौल और बेहतर बनता है।
माइका एडमिशन सेल की अध्यक्ष डॉ.रुचि तिवारी ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी माइका के नए बैच में लिंग, आयु, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कार्य अनुभव के लिहाज से विविधता देखने को मिल रही है। जबकि संस्थान अपने प्रवेश नियमों में किसी के लिए भी कोई भी रियायत नहीं देता है।
फार्मा स्नातक छात्रा सुस्मिता पुजारी ने कहा कि उन्होंने पाया है कि लोग उत्पाद को खरीदने के दौरान उसके स्वास्थ्य पर असर, उसमें मिले रसायन के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। वे आशा करती हैं कि वे संस्थान में शिक्षा पाकर इस कमी को दूर करने में सफल होंगीं।

साल छात्राओं का प्रतिशत (संख्या) कुल विद्यार्थी
२०२१-२३ ४९.७५ (९१) १८३
२०२०-२२ ५५.५५ (१२०) २१६
२०१९-२१ ४७.६८ (१०३) २१६
२०१८-२० ४७.७७ (८६) १८०
२०१७-१९ ४७.२२(८५) १८०

nagendra singh rathore
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