रेडिएशन के खतरे से बचाव को फुटपाथ पर नहीं सबसे ऊंची इमारत पर लगे मोबाइल टावर

गुजरात को दूर संचार मंत्रालय के एक अगस्त २०१३ के दिशा-निर्देशों की पालना करने की जरूरत, नहीं हो रही जनता की शिकायतों की सुनवाई, मोबाइल टावर रेडिएशन से खतरे के प्रति कई सालों से लोगों को जागरुक कर रहे हैं एक्टिविस्ट प्रकाश मुंशी

By: nagendra singh rathore

Published: 08 Aug 2019, 08:56 PM IST

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. मोबाइल टावर से निकलने वाले इलैक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन (ईएमएफ-रेडिएशन) के खतरे से लोगों को बचाने के लिए जरूरी है कि फुटपाथ पर नहीं बल्कि संबंधित इलाके की सबसे ऊंची इमारत पर मोबाइल के टावर लगाए जाएं।
इसके लिए जरूरी है कि गुजरात सरकार भारत सरकार के दूर संचार मंत्रालय की ओर से एक अगस्त २०१३ को जारी किए गए मोबाइल टावर लगाने से जुड़े दिशा-निर्देशों की तत्काल प्रभाव से पालना करे। करीब छह साल के बाद भी इन दिशा-निर्देशों की पालना नहीं हो पाने की वजह से गुजरात में मोबाइल टावर लगाने को लेकर होने वाले विरोध, रेडिएशन से जुड़ी गुजरात के लोगों की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो पा रहा है। क्योंकि जिला स्तर पर तो छोड़ा राज्य स्तर पर भी इसको लेकर कोई शिकायत निवारण समिति ही गठित नहीं की गई है।
यह कहना है मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के खतरे से लोगों को जागरुक करने वाले मुंबई के सिटीजन फॉर टुमोरो के सामाजिक कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) प्रकाश मुंशी का। जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को इस मामले में पत्र लिखकर कुछ ठोस कदम उठाने के लिए आग्रह किया है।
प्रश्न: आप इतने साल से मोबाइल टावर रेडिएशन से होने वाले खतरों के प्रति जागरुक करने का काम कर रहे हैं। गुजरात के संदर्भ में सरकार को कौन से कदम उठाने की जरूरत समझते हैं?
जवाब-गुजरात सरकार को चाहिए कि वह दूर संचार मंत्रालय के २०१३ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में मोबाइल टावर लगाने को लेकर एक समावेशी नीति एवं नियम बनाए। जिसमें जिले से लेकर राज्य सरकार के स्तर पर शिकायत निवारण समिति का भी प्रावधान है।
प्रश्न: गुजरात के किन किन शहरों से रेडिएशन एवं मोबाइल टावर से जुड़ी शिकायतें मिल रही हैं। किस प्रकार की शिकायतें मिल रही हैं?
जवाब-गुजरात में न सिर्फ अहमदाबाद बल्कि वडोदरा, सूरत, सुरेन्द्रनगर से उन्हें शिकायतें मिल रही हैं। जिसमें रेडिएशन के खतरे से लेकर फुटपाथ पर, बगीचे के पास, ऊंची इमारतों के पास रोड पर मोबाइल टावर लगाने से होने वाली परेशानी वे जता रहे हैं।
प्रश्न-रेडिएशन से बचाव के लिए लोग खुद क्या सावधानी बरत सकते हैं?
जवाब-लोगों को रेडिएशन से बचाव करने वाली डबल विन्डो लगाने की जरूरत है। इसके अलावा वे मच्छर से बचाने वाली महीन छेद वाली जाली को एल्युमिनियम फोइल के साथ लगाएं और उसे अर्थिंग दें तो रेडिएशन के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
प्रश्न-गुजरात में टैरेस, फुटपाथ, डिवाइजर पर भी मोबाइल टावर लगाने की मंजूरी दी जा रही है। इस बारे में क्या कहेंगे?
जवाब-यही समस्या है कि सरकार इसको लेकर गंभीर नहीं दिख रही। उन्हें जनता की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। डिवाइडर पर टावर खड़ा करने से उससे होकर गुजरने वाले बुजुर्ग, बच्चों को काफी दिक्कत होती है। ट्रैफिक में वे हादसे का भी शिकार हो सकते हैं। जरूरी है कि सरकार जनसुविधाओं, जनता के स्वास्थ्य का ध्यान रखकर मंजूरी दे। मुंबई में पब्लिक स्पेस में मोबाइल टावर लगाने की मंजूरी नहीं है।
प्रश्न-अब जल्द ही ५ जी की भी बात हो रही है। उसके आने पर मोबाइल टावरों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में सरकार को क्या कदम उठाने की जरूरत है?
जवाब-4 जी के लिए ही तीन सौ मीटर के दायरे में टावर लगाने की दलील कंपनियां कर रही हैं। 5 जी में और आएंगीं। ऐसे में यदि सरकार ने इस दिशा में गंभीरता से कदम नहीं उठाए तो स्थिति अति गंभीर हो जाएगी।
प्रश्न-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी, अहमदाबाद महानगर पालिका के आयुक्त एवं टर्म सेल के अधिकारियों का कहना है कि भारत में रेडिएशन का स्तर अंतरराष्ट्रीय नियम (आईसीएनआईआरपी) से दस गुना कम रखे गए हैं। जिसे ९०० मेगा हट्र्ज पर ०.४५ वॉट/मीटर2, १८०० मेगाहट्र्ज पर ०.९ वॉट/मीटर2 और २१०० व उससे ऊपर 1वॉट/मीटर2 रखा गया है। जिससे खतरा नहिवत है?
जवाब-विश्व की बात करें तो रूस, बुल्गेरिया, इटली, लिथूआनिया एवं पोलेन्ड में ९००,१८००,२१०० मेगाहट्र्ज फ्र्क्विेंसी पर पावर डेन्सिटी ०.१वॉट्/मीटर2 (यानि केवल सौ मिलीवॉट प्रति स्क्वेयर मीटर पावर डेनसिटी) है। यानि भारत के स्तर से भी पांच गुना कम है। तो हम क्यों नहीं इन देशों के अनुरूप रेडिएशन का स्तर रख सकते हैं। इस पर गंभीरता सोचने की जरूरत है क्योंकि ये लोगों के स्वास्थ्य का सवाल है।

प्रश्न-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी, अहमदाबाद महानगर पालिका के आयुक्त एवं टर्म सेल के अधिकारियों की दलील है कि मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के प्रभाव में रहने के चलते कैंसर होने की बातें सिर्फ कही जा रही हैं। इसका कोई तथ्यात्मक व वैज्ञानिक प्रमाण कोई नहीं मिला है?

जवाब-अभी तक इसका भी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि मोबाइल रेडिएशन के चलते लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंच रहा है। अब तो अमरीका व अन्य देशों में इसको लेकर हुई रिसर्च में कुछ प्रमाण भी मिले हैं, जो बताते हैं कि इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न-एक ओर जहां लोग मोबाइल नेटवर्क के कमजोर सिग्नल की शिकायत करते हैं वहीं दूसरी ओर घर के पास टावर लगाने का विरोध भी। ऐसे में सुविधा भी मिले और स्वास्थ्य पर असर भी ना हो उसका क्या रास्ता हो सकता है?
जवाब-कंपनियों को जरूरत है कि इलाके की सबसे ऊंची इमारत पर मोबाइल टावर लगाएं ताकि रेडिएशन का खतरा कम से कम हो। अभी 10 मंजिला इमारत के पास टावर लगा देते हैं, जिससे पांचवीं से लेकर 10वीं मंजिल पर सामने रहने वाले रेडिएशन के निरंतर खतरे में जीते हैं। जो उनके लिए हानिकारक है। सभी कंपनियों को टावर लगाने की मंजूरी नहीं दी जाए। एक दूसरे के उपयोग की छूट दी जाए। ओप्टिकल फाइबर केबल का उपयोग हो।
प्रश्न-गुजरात सरकार को किस प्रकार की पोलिसी बनानी चाहिए जो लोग और मोबाइल कंपनियां दोनों के अनुकूल हो?
जवाब-रेडिएशन के स्तर को मौजूदा स्तर से घटाकर रूस, बुल्गेरिया सरीखे देशों के बराबर करने की जरूरत है, जिसके लिए केन्द्र सरकार को कदम उठाने चाहिए। गुजरात सरकार को केन्द्र के 2013 के दिशा निर्देश अपनाते हुए समावेशी नीति जल्द बनानी चाहिए। फुटपाथ, ऊंची इमारतों के समीप रोड पर, बगीचों में, स्कूल, कॉलेजों के पास, सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल टावर लगाने की मंजूरी देने से बचना चाहिए।

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