‘फेसबुक पर तय होने वाले आधुनिक विवाह होते हैं विफल’

‘फेसबुक पर तय होने वाले आधुनिक विवाह होते हैं विफल’

Uday Kumar Patel | Publish: Jan, 25 2018 11:33:45 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

हाईकोर्ट ने सास-ससुर-देवर की शिकायत रद्द की

अहमदाबाद. घरेलू हिंसा व दहेज प्रताडऩा को लेकर शिकायत रद्द करने के मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि फेसबुक पर तय होने वाले आधुनिक विवाह विफल होते हैं। फेसबुक के मार्फत तय हुए विवाह को लेकर न्यायालय के समक्ष आए एक मामले में न्यायालय ने कहा कि यह फेसबुक पर तय होने वाले आधुनिक विवाहों में से एक है जिसका विफल होना तय है। न्यायालय ने यह भी कहा कि पति-पत्नी को इस मामले में सहमतिपूर्वक विवाह का अंत लाना चाहिए। पति-पत्नी दोनों अभी युवा हैं।

न्यायालय ने कहा कि पति-पत्नी ने मामले के समाधान की कोशिश की, लेकिन यह विवाद सुलझा नहीं। हालांकि न्यायालय ने यह भी कहा कि अभी भी पति-पत्नी समाधान की संभावनाएं तलाश सकते हैं और सहमति के साथ विवाह का अंत ला सकते हैं। एक बार पति-पत्नी विवाह को लेकर कोई फैसला ले लें तो वे दोनों भविष्य के जीवन को लेकर विचार कर सकते हैं। उच्च न्यायालय ने सास-ससुर-देवर की ओर से उनके खिलाफ दर्ज शिकायत रद्द करने की गुहार मान्य रखते हुए यह भी कहा कि पति के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर जांच जारी रखी जा सकती है।
मामले के अनुसार खुशबू फेसबुक के मार्फत चिराग(दोनों नाम बदले) के संपर्क में आई। इसके बाद दोनों मिलने लगे और फिर फरवरी 2015 में विवाह भी हो गया, लेकिन दो महीने के भीतर ही उनके बीच वैवाहिक जीवन में परेशानी आने लगी। घरेलू झगड़े को लेकर खुशबू ने राजकोट महिला थाने में अपने पति, सास, ससुर व देवर के खिलाफ घरेलू हिंसा के तहत मामला दर्ज कराया। हालांकि ज्यादा आरोप पति के खिलाफ लगे हैं।

 

 

 

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने कहा गर्भपात सुरक्षित नहीं

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने साबरकांठा जिले की एक दुष्कर्म पीडि़ता की 30 सप्ताह के गर्भ के गर्भपात की गुहार पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
इस मामले में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 31 महीने से ज्यादा का गर्भ होने के कारण गर्भपात कराना सुरक्षित नहीं है।
न्यायाधीश जे बी पारडीवाला ने मंगलवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से पीडि़ता की जांच कर उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति की स्पष्ट रिपोर्ट बताने को कहा था। बुधवार को पेश रिपोर्ट में कहा गया कि हाल की स्थिति में 31 सप्ताह के गर्भ का गर्भपात पीडि़ता के हित में नहीं है।
दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की ओर से गर्भपात की गुहार लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि पीडि़ता नाबालिग है, इसलिए गर्भपात की मंजूरी दी जाए।
इस मामले में इससे पहले हिम्मतनगर की जीएमआरईएस अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की टीम ने भी यह राय दी थी कि पीडि़ता के 30 सप्ताह व 1 दिन का गर्भ है। इसलिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट के तहत गर्भपात की मंजूरी नहीं दी जा सकती।

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