मुस्लिम सरोगेट माता ने हिन्दू दंपती को दिया पुत्र का सुख

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

बच्चे के जन्म तक सात्विक भोजन, शास्त्रों का पाठ किया

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 17 Nov 2020, 11:55 AM IST

राजकोट. राजकोट शहर में हिन्दू प्रौढ़ दंपती को पुत्र का सुख प्राप्त कराने के लिए मुस्लिम महिला ने सरोगेसी के जरिए मां बनकर सांप्रदायिक एकता का उदाहरण व राष्ट्रीय एकता के संदर्भ में प्रेरणादायक प्रयोग किया है।
शहर के एक निजी चिकित्सालय के डॉ. भावेश विठलाणी ने बताया कि भारतीय सेना की 16वीं बिहार रेजीमेंट से सेवानिवृत्त हुए गजेन्द्रसिंह वर्तमान में सैनिक मंडल में सेवारत हैं। विवाह के बाद गजेन्द्रसिंह की पत्नी ने एक पुत्र व एक पुत्री को जन्म दिया था। 19 वर्ष की आयु में उनके पुत्र को कैंसर का निदान हुआ, लेकिन उपचार के बावजूद उनके पुत्र का निधन हो गया।
प्रौढ़ावस्था में पुत्र को गंवाने के बाद दंपती ने पुन: पुत्र प्राप्ति के लिए प्रयास शुरू किए। अनेक चिकित्सकों से उपचार कराने के बावजूद परिणाम नहीं मिलने पर पिछले वर्ष जुलाई महीने में डॉ. भावेश से संपर्क किया। गजेन्द्रसिंह की पत्नी की उम्र अधिक होने, शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर डॉ. भावेश ने सरोगेट महिला की तलाश करने का निर्णय किया।
इस दौरान एक मुस्लिम महिला सरोगेट मां बनने के लिए तैयार हुई। डॉ. भावेश के अनुसार वर्तमान समय में हिन्दू दंपती को संतान सुख दिलाने के लिए आगे आए, यह बात सराहनीय कही जा सकती है। उन्होंने आईवीएफ पद्धति से संतान प्राप्ति के लिए उपचार शुरू किया और टेस्ट ट्यूब में भ्रूण विकसित होने के बाद उसे सरोगेट महिला के गर्भ में स्थापित किया। प्रथम प्रयत्न में काफी अच्छा परिणाम मिला और पिछले अगस्त महीने में पूर्व सैनिक दंपती के घर में पुत्र ने जन्म लिया। इसके साथ ही दंपती के परिवार में फिर-से खुशियों का माहौल देखने को मिला।

केवल शाकाहारी भोजन का सेवन किया

डॉ. भावेश के अनुसार गजेन्द्रसिंह ने कहा कि डॉ. भावेश के कारण दंपती के जीवन में पुन: खुशी का माहौल है। सरोगेट मां बनी अफसाना के अनुसार वह एक पेशेवर सरोगेट महिला नहीं है, लेकिन एक पूर्व सैनिक के परिवार को खुशियां दिलाने के लिए उसने सरोगेट मां बनने का फैसला किया। इस दौरान केवल शाकाहारी भोजन का सेवन किया। उन्होंने हिंदू संस्कृति को जानने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर भ्रूण को संस्कार दिए। इसके अलावा स्वस्थ बालक के जन्म के लिए मानता (बाधा) भी रखी और प्रार्थना से लेकर हिन्दू-भारतीय शास्त्र भी पढ़े।

Rajesh Bhatnagar
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