scriptNarmada Ben dedicated to the food of the poor | Gujarat social News पति के निधन के बाद भी गरीबों के भोजन के लिए समर्पित 'नर्मदा बेन' | Patrika News

Gujarat social News पति के निधन के बाद भी गरीबों के भोजन के लिए समर्पित 'नर्मदा बेन'

रामभरोसे अन्न क्षेत्र में रोजाना 250 से 300 लोगों को कराती हैं भोजन

अहमदाबाद

Published: September 09, 2022 10:00:51 pm

वडोदरा. शहर के आर वी देसाई रोड पर रहने वाली नर्मदा पटेल पिछले 35 वर्षों से रोज असहाय और गरीब लोगों को भोजन कराती है। रोज सुबह 4 बजे उठकर खुद ही 250 से 300 लोगों का भोजन तैयार करती हैं, इसके बाद इसे लेकर शहर की विभिन्न सड़कों पर जाकर फुटपाथ पर बैठे और अस्पतालों में मरीजों व उनके परिजनों को भोजन कराती है। वर्षोंं से इनकी सेवा से प्रभावित सड़क से गुजरते लोग भी इनके साथ जुड़कर हाथ बंटाने लगते हैं।


Gujarat social News पति के निधन के बाद भी गरीबों के भोजन के लिए समर्पित 'नर्मदा बेन'
Gujarat social News पति के निधन के बाद भी गरीबों के भोजन के लिए समर्पित 'नर्मदा बेन'
पति के निधन के बाद भी जारी रखी सेवा
नर्मदा पटेल बताती हैं कि पति अंबालाल पटेल के साथ मिलकर उन्होंने लोगों को भोजन कराने का कार्य शुरू किया था। पति के निधन के बाद भी सेवा बंद नहीं की। पति के निधन के दिन भी उन्होंने लोगों को भोजन कराने के कार्य को बंद नहीं किया, उस दिन भी सड़क के फुटपाथ और अस्पताल में मरीजों व परिजनों की भूख मिटाने को प्राथमिकता दी। इस कार्य के बाद वे पति के अंतिम संस्कार में जुड़ी।
Gujarat social News पति के निधन के बाद भी गरीबों के भोजन के लिए समर्पित 'नर्मदा बेन'8 गांवों को लिया दत्तक
नर्मदा के पुत्र इंद्रवदन पटेल के अनुसार पिता की सेवानिवृत्त के बाद समाज को कुछ देने की भावना के साथ पिता ने गरीबों को भोजन कराने के सेवा कार्य की शुरुआत की। उस समय वे भोजन लेकर स्कूटर से 10-15 लोगों के लिए भोजन पहुंचाते थे। 35 वर्ष पूर्व पिता के निधन के बाद माता ने यह सेवा कार्य अपने हाथ में लिया। उनकी माता की उम्र 84 वर्ष है, माता ने आठ गांव को भी दत्तक लिया है। इन गांवों में वे भोजन के अलावा शिक्षा और वस्त्र पहुंचाती हैं। माता सुबह 4 बजे से जरूरमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था में जुट जाती हैं। भोजन बनाने के बाद वे खुद ही लोगों को गर्म-गर्म खाना खिलाती हैं।

सयाजी अस्पताल में करती हैं सेवा कार्य
नर्मदा रोज सुबह दाल, चावल, खमण और शिरा समेत अन्य व्यंजन बनाती हैं। भोजन रिक्शा में लेकर काशी विश्वनाथ, बदामडी बाग, कीर्ति मंदिर और मांडवी समेत विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंदों को देती हैं। इसके बाद वे सयाजी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को भोजन और टिफिन देती हैं।

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