scriptNatural agriculture is a strong alternative : Governor | रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का मजबूत विकल्प है प्राकृतिक कृषि : राज्यपाल | Patrika News

रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का मजबूत विकल्प है प्राकृतिक कृषि : राज्यपाल

locationअहमदाबादPublished: Dec 19, 2023 10:44:37 pm

Submitted by:

Rajesh Bhatnagar

भारतीय किसान संघ, कड़ी की ओर से जहरमुक्त खेती पर प्रशिक्षण शिविर

रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का मजबूत विकल्प है प्राकृतिक कृषि : राज्यपाल
रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का मजबूत विकल्प है प्राकृतिक कृषि : राज्यपाल
अहमदाबाद/मेहसाणा. राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मंगलवार को कहा कि रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का मजबूत विकल्प प्राकृतिक कृषि है।

भारतीय किसान संघ, कड़ी की ओर से जहरमुक्त खेती पर प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने यह बात कही।राज्यपाल ने देसी गाय को परमात्मा का वरदान बताते हुए कहा कि पशुधन के बगैर प्राकृतिक कृषि संभव नहीं है। प्राकृतिक कृषि के लिए देसी नस्ल की गाय का महत्व सबसे ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि जंगल में जिस तरह वृक्ष-वनस्पतियों का रासायनिक खाद और कीटनाशक के बगैर कुदरती तौर पर विकास और वृद्धि होती है, वैसे ही प्राकृतिक पद्धति से खेतों में उत्पादन प्राप्त करना ही प्राकृतिक कृषि है।राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण और किसानों के लिए आशीर्वाद बताते हुए कहा कि रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से मुक्ति पाने का प्राकृतिक कृषि एक मजबूत विकल्प है।
उत्पाद का लाभ ज्यादा मिलने से समृद्ध होते हैं किसान

राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक कृषि से जल-जमीन और पर्यावरण की रक्षा होती है, कृषि उत्पादन घटता नहीं है। देसी गाय का जतन और संवर्धन होता है। पानी की बचत होती है। कृषि खर्च नहीं के बराबर होता है, जिससे स्वास्थ्यप्रद उत्पादन मिलता है और अंतत: किसानों को उत्पाद का लाभ ज्यादा मिलने से वह समृद्ध होते हैं।
गुजरात में 9 लाख किसान प्राकृतिक कृषि के साथ जुड़े

राज्यपाल ने कहा कि गुजरात में 9 लाख किसान प्राकृतिक कृषि के साथ जुड़ चुके हैं। उन्होंने धरती माता का ऋण चुकाने और रासायनिक खाद जैसा जहर नहीं परोसने की किसानों से अपील की।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के पीछे रासायनिक कृषि 24 फीसदी जिम्मेदार है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग के कारण जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन लगातार घटता जा रहा है।

प्राकृतिक खेती, जैविक खेती में फर्क
प्राकृतिक खेती और जैविक खेती के बीच का फर्क समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह दोनों पद्धतियां बिलकुल अलग हैं। जैविक खेती में कृषि खर्च घटता नहीं है और खरपतवार की समस्या का हल नहीं होता। वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण का खर्च भी ज्यादा होता है। विदेशी केंचुए भारतीय वातावरण में पूरी क्षमता से काम ही नहीं कर पाते हैं। जैविक खेती में शुरुआती वर्षों में उत्पादन घटता है, इस कारण किसानों के लिए जैविक खेती ज्यादा लाभदायी नहीं है। जबकि प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर-गौ मूत्र के मिश्रण से बनने वाले जीवामृत-घनजीवामृत से जमीन में सूक्ष्मजीवों और केंचुओं जैसे मित्रजीवों की वृद्धि होती है और जमीन की उर्वरकता बढ़ती है। उत्पादन बढ़ता है और कृषि खर्च घटता है, बल्कि नहीं के बराबर होता है। पर्याप्त उत्पादन मिलने के कारण यह पद्धति किसानों के लिए लाभदायी है।
इस मौके पर पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल, गुजरात राज्य किसान संघ के अध्यक्ष जगमल आर्य, कड़ी मार्केट यार्ड के चेयरमैन राजेंद्र पटेल, किसान संघ के अग्रणी, बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।

ट्रेंडिंग वीडियो