अहमदाबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कर्णावती महानगर इकाई की ओर से सामाजिक सद्भावना कार्यकर्ता सम्मेलन यहां जमालपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में रविवार को आयोजित किया गया।
आरएसएस के गुजरात प्रांत के प्रचारक चिंतन उपाध्याय ने बहिष्कार नहीं, परिष्कार पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज में रहकर आत्मचिंतन से परिष्कार की भावना रखकर रीति-नीति में आवश्यक नए व समयानुसार परिवर्तन कर निरंतर कार्यरत रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जाति ने सामाजिक सुरक्षा का कवच दिया है लेकिन जातियों में सद्भावना होगी तो समाज निर्माण से राष्ट्र निर्माण का कार्य संभव हो सकेगा। राष्ट्र निर्माण के लिए सत्ता के बजाय समाज निर्माण अधिक प्रभावशाली पद्धति है।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी व्रत, मातृभाषा में शिक्षा, महिलाओं के व्रतों के महत्व, स्वदेशी उत्पादनों व स्वभाषा के महत्व को प्रोत्साहन देना जरूरी है। सामूहिक चिंतन व सर्वानुमति से एक विचारधारा को आगे बढ़ाना व एक से दूसरी पीढ़ी तक सामाजिक धरोहर को अक्षुण्ण रखना संभव है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला, सम्मेलन सामाजिक सद्भावना व समाज चिंतन के लिए आयोजित किया गया है। आरएसएस के द्वितीय सर संघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ के जन्म शताब्दी वर्ष 2006 से अनेक कार्य शुरू किए गए और सामाजिक सद्भावना के लिए कार्य की शुरुआत की गई। पिछले 12 वर्ष में कार्य के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में विविध जातियों के अग्रणी जुडक़र समाज निर्माण के लिए चिंतन कर रहे हैं।
प्रारंभ में जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीपदास महाराज ने आशीर्वचन में कहा कि ‘जगन्नाथ का भात, न जात न पात’। यह मंदिर कौमी एकता व सामाजिक सदरसता का प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में देखा जाता है कि समसर समाज का दर्शन देखने को मिलता है। आरएसएस की ओर से सामाजिक समरसता व सद्भावना के लिए कार्यकर्ता निरंतर जागृति का कार्य कर रहे हैं, यह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जाति के समुदायों में सद्भावना आवश्यक है।
6 हजार लोगों को जोडऩे का लक्ष्य
महानगर कार्यवाह तेजस पटेल ने स्वागत भाषण के दौरान कहा कि आरएसएस की ओर से विविध जातियों के अग्रणियों के सहयोग से महानगर में 59 नगरों में (स्थानों पर) सद्भावना समितियां गठित की गई हैं। प्रत्येक समिति में 10-15 सदस्यों के साथ 471 से अधिक कार्यकर्ता स्वैच्छा से जुडक़र सद्भावना बढ़ाने व समाज निर्माण के कार्य में जुटे हैं। सभी जातियों के लिए एक मंदिर, एक कुआ व एक श्मशान के संकल्प को आगे बढ़ाने व अग्रणियों के समक्ष रखने के लिए आगामी वर्ष तक 6 हजार लोगों को जोडऩे का लक्ष्य है।
विविध समितियों के प्रतिनिधियों ने सद्भावना समिति की ओर से ग्लोबल वॉर्मिंग, तुलसी के पौधे वितरित करने, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, लव जेहाद सरीखी वारदातों पर रैली निकालकर प्रदर्शन करने, सर्वजाति सामूहिक विवाह, बेटी बचाओ व कन्या पूजन, अन्य राज्यों के लोगों पर हुए हमलों के समय सद्भावना समितियों की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा के लिए किए गए प्रयत्न आदि के बारे में अनुभव सुनाए। सम्मेलन में आरएसएस की कर्णावती महानगर इकाई के संघचालक महेश परीख आदि भी मौजूद थे।

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