राजेन्द्र धारीवाल/राजेश भटनागर

पालनपुर/ अहमदाबाद. कोरोना महामारी के दौरान विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई भले ही सफल हो रही हो या नहीं, भले ही इसे अनेक सवाल खड़े किए जा रहे हों, लेकिन गुजरात में एक ऐसा भी गांव है जिसमें अच्छी गुणवत्ता के मोबाइल फोन, नेटवर्क या टेलीविजन के अभाव के बावजूद माइक से पढ़ाई का नया प्रयोग शुरु किया गया है।

बनासकांठा जिले की पालनपुर तहसील के पारपडा गांव में कई अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल फोन, इंटरनेट व टीवी की सुविधा नहीं है। इस कारण गांव के 200 विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करने की समस्या का सामना कर रहे थे। इससे शिक्षकों के समक्ष भी प्रश्न खड़ा हो गया।

गांव में सार्वजनिक स्थलों पर लगवाई 16 माइक

शिक्षक शैलेष रावल के अनुसार विद्यार्थियों की शिक्षा को लेकर चिंता थी। सभी शिक्षकों ने मिलकर विचार-विमर्श किया। अभिभावकों का अनावश्यक खर्च बचाने के लिए माइक से पढ़ाने का विचार आने पर गांव के सरपंच को समस्या बताई। ग्राम पंचायत की ओर से गांव में सार्वजनिक स्थानों पर 16 माइक लगवाकर संचालन शुरू किया गया। इस तरह ग्राम पंचायत व विद्यालय प्रबंधन की ओर से माइक से पढ़ाई का नया प्रयोग किया गया है।

घरों, मंदिरों के पास लगे माइक

इसके बाद विद्यालय के शिक्षकों ने अलग-अलग विषयों के अनुसार माइक से अध्यापन प्रारंभ किया और 200 विद्यार्थी अपने घरों, मंदिरों व अन्य सुविधाजनक स्थानों के समीप लगे माइक के निकट बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। गुजरात में संभवत: पहली बार शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत हर दूसरे दिन टेस्ट लिए जाते हैं और माइक पर विद्यार्थियों को प्रश्न दिए जाते हैं।

घर-घर जाकर दी जानकारी

शिक्षिका दीपिकाबेन व शिक्षक परेश भाई का कहना है कि विद्यालय के प्राचार्य व शिक्षकों ने विचार कर इस नई शिक्षा पद्धति को अंजाम तक पहुंचाया। शिक्षकों ने गांव में घर-घर जाकर इस व्यवस्था व समय के बारे में जानकारी दी और साथ ही ‘स्कूल बंद लेकिन पढ़ाई बंद नहीं’ के सूत्र को साकार कर दिखाया। प्रतिदिन सवेरे 8 से 11 बजे तक शिक्षक विद्यालय में माइक के जरिए अपने-अपने विषय का शिक्षण कार्य कर रहे हैं। छात्रा भाविका के अनुसार नई व्यवस्था अच्छी है, बिना किसी प्रकार के अवरोध के शांति से पढ़ाई हो रही है।

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सूझबूझ व मेहनत का परिणाम

विद्यालय के प्राचार्य व शिक्षकों की सूझबूझ व मेहनत का परिणाम है कि विद्यालय बंद होने के बावजूद गांव के 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस व्यवस्था से गांव के विद्यार्थी व अभिभावक भी खुश हैं।

रमेशभाई, सरपंच, पारपडा ग्राम पंचायत

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