ओढव के शिवम फ्लैट के तोड़े जाएंगे सभी ब्लॉक

ओढव के शिवम फ्लैट के तोड़े जाएंगे सभी ब्लॉक

Omprakash Sharma | Publish: Sep, 06 2018 10:27:41 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

मूल मालिक को वैकल्पिक व्यवस्था व री-डवलेपमेंट के बाद मिलेगा मकान

अहमदाबाद. शहर के ओढव क्षेत्र के गरीब आवास शिवम फ्लैट के शेष सभी ब्लॉक तोडऩे का निर्णय किया है। गत २६ अगस्त को शिवम फ्लैट के दो ब्लॉक धराशायी होने के बाद हरकत में आए महानगरपालिका प्रशासन ने पांच ब्लॉक जर्जरित बताकर गिरा दिए। जबकि अन्य बीस को खाली करने के नोटिस दे दिए गए। महानगरपालिका की गुरुवार को हुई स्टेंडिंग कमेटी में शेष सभी ब्लॉक को आगामी दिनों में तोडऩे का निर्णय किया है। इसके लिए मूल मालिक को फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था और री-डवलेपमेंट के बाद मकान की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि इसके लिए मकानधारकों को बकाया का भुगतान करना होगा।
शिवम फ्लैट के ८४ ब्लॉक में कुल १३३२ आवास एवं २४ दुकानों का निर्माण शहरी गरीब अवास के अन्तर्गत किया गया था। इनमें से गत २६ अगस्त को २३ एवं २४ नंबर ब्लॉक के ३२ आवास धराशायी हो गए थे। महानगरपालिका के स्टेंडिंग कमेटी के चेयरमैन अमूल भट्ट के अनुसार अन्य दस ब्लॉक इन्जीनियरिंग विभाग की रिपोर्ट के आधार पर तोड़ऩे का निर्णय किया था। उनके अनुसार सभी ब्लॉक जर्जरित होने के कारण उनमें रहा नहीं जा सकता। इस आशय की रिपोर्ट के बाद सभी ब्लॉक तोड़े जाएंगे। इससे इन आवासों में रहने वाले मूल मालिकों को उनके दस्तावेजों के आधार पर रहने की वैकल्पिक व्यवस्था और उसके बाद री डवलेपमेंट के बाद आवास दिया जाएगा।
१८२ लोग ही रहते हैं मूल मालिक
स्थायी समति के चेयरमैन ने बताया कि शिवम प्लैट के सभी १३३२ मकानों का हाल ही में सर्वे किया गया था। इनमें से मात्र १८२ लोग ही मूल मालिक रहते हुए मिले। कई ने किराए से दे दिए तो तो कुछ यहां से बेचकर चले गए थे।
बकाया का करना होगा भुगतान
मूल मालिक के समक्ष शर्त रखी गई है कि उसके मकान के दस्तावेजों के आधार पर री-डवलेपमेंट के बाद मकान पाने के लिए उसे मकान संबंधित बकाया राशि का भुकदान करना पड़ेगा। जिन लोगों ने लाभार्थी से मकान खरीदे हैं उन्हें भी री-डवलेपमेंट का लाभ भी इसी शर्त पर मिल सकेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मूल लाभार्थी जो हालमें इन मकानों में नहीं रह रहा था वे लाभ से वंचित रहेंगे।
मकान लेने के बाद नहीं किया था भुगतान
इन मकानों में रहने वाले अधिकांश लोगों ने मकान कब्जे में आने के बाद मकान संबंधित बैंक की किस्त भी अदा नहीं की थी। कई ऐसे हैं जो बिजली का बिल भी नहीं दे पाए हैं। इस तरह के बकाया का भुगतान करने के बाद उन्हें सशर्त लाभ मिल सकेगा।
जांच के बाद उचित कार्रवाई
स्थायी समिति के अध्यक्ष अमूल भट्ट के अनुसार अठारह-उन्नीस वर्षों में ही मकानों के जर्जिरत होने के संबंध में जांच गुजरात इन्जीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को सौंपी गई है। शिवम फ्लैट के ढहे मकानों से नमूने भी जांच को भेजे गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

Ad Block is Banned