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विश्व का 48 फीसदी ऑनलाइन लेनदेन अकेले भारत में : प्रो. आलोक

locationअहमदाबादPublished: Feb 04, 2024 08:34:44 pm

Submitted by:

Pushpendra Rajput

भारतीय ज्ञान परंपराएं: संचार और महत्व विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

विश्व का 48 फीसदी ऑनलाइन लेनदेन अकेले भारत में : प्रो. आलोक
विश्व का 48 फीसदी ऑनलाइन लेनदेन अकेले भारत में : प्रो. आलोक
गांधीनगर. भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। पूरे विश्व का 48 फीसदी ऑनलाइन लेनदेन अकेले भारत में हो रहा है। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने यह बात कही।
वे मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजी) में भारतीय ज्ञान परंपराएं: संचार और महत्व विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी खुद को बड़ा और दूसरों को छोटा नहीं बताना चाहिए। पश्चिमी देशों ने भारत को हमेशा कमतर ज्ञानवान समझने की भूल की है। उन्होंने अर्थशास्त्र के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हमें फादर ऑफ इकोनॉमिक्स पर एडम स्मिथ याद है लेकिन भारत में अर्थशास्त्र की पूर्ण जानकारी कौटिल्य अपनी पुस्तक में कई वर्षों पहले ही दे चुके हैं।कार्यक्रम में समापन सत्र के मुख्य वक्ता जेएनयू दिल्ली के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रो.अश्विनी महापात्र ने कहा कि पश्चिमी सोच से हमें अब बाहर निकलने की जरूरत है। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अतनु महापात्र ने कहा कि सम्मेलन में 230 से अधिक एब्सट्रेक्ट प्राप्त हुए हैं। साथ ही 180 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
विकसित भारत के लिए ज्ञान परंपरा के भारतीय मॉडल की आवश्यकता

विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि देश में वर्तमान में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है कि मंदिर के निर्माण से रोजगार नहीं मिल सकता है, लेकिन सदियों से हमारे भारतवर्ष में मंदिर और रोजगार साथ-साथ चले है । पिछले 70 वर्षों में हमारी अप्रोच सही नहीं रही है। उन्होंने विकसित भारत के लिए ज्ञान परंपरा के भारतीय मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया।

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