डोनेशन के खिलाफ जनहित याचिका, बड़ी स्कूलों के नाम

शहर के विभिन्न निजी स्कूलों के डोनेशन फीस लेने के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की

By: मुकेश शर्मा

Published: 29 Jun 2016, 11:42 PM IST

अहमदाबाद।शहर के विभिन्न निजी स्कूलों के डोनेशन फीस लेने के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी एम पंचोली की खंडपीठ ने इस मामले में शहर के 12 स्कूलों को प्रतिवादी बनाए जाने का निर्देश दिया है।

इन स्कूलों में उदगम स्कूल, जेबर स्कूल (दोनों थलतेज), आनंद निकेतन (शीलज व थलतेज), संत कबीर स्कूल आविष्कार इंटरनेशनल स्कूल, जे जी इंटरनेशनल स्कूल, लालजी मेहरोत्रा लायन्स स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल-बोपल, त्रिपदा इंटरनेशनल स्कूल-घाटलोडिया, सत्व विकास स्कूल, डीएवी इंटरनेशनल स्कूल, एचबी कापडिय़ा स्कूल-मेमनगर, शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता ऋतुराज मेहता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि स्कूलों की ओर से फीस के अलावा जो अन्य रकम वसूली जाती है वह पूरी तरह अनुुचित व अयोग्य है। आरटीई एक्ट 2013 के तहत स्कूल फीस के अलावा कोईअ्न्य रकम नहीं ली जा सकती है।

एक लाख तक लेते हैं फीस

याचिका में यह दावा किया गया कि शहर के 12 स्कूलों ने शैक्षणिक वर्ष 2016-17 के दौरान पहली कक्षा में दाखिले के लिए एक लाख तक का डोनेशन व अन्य फीस ली जाती है। थलतेज स्थित उदगम  स्कूल की ओर से डोनेशन फीस के रूप में एक लाख रुपए लिया जाता है। वहीं जेब्बर स्कूल 50 हजार रुपए,  आनंद निकेतन 50 हजार तथा कॉशन मनी के रूप में 40 हजार, आविष्कार इंटरनेशनल स्कूल 20 हजार, जे जी इंटरनेशनल स्कूल 85 हजार, लालजी मेहरोत्रा स्कूल 30 हजार (चौथी कक्षा तक) तथा पांचवी कक्षा से उपर 35 हजार, डीपीएस-बोपल 30 हजार, त्रिपदा इंटरनेशनल स्कूल 20 हजार, सत्व विकास स्कूल 40 हजार, डीएवी इंटरनेशनल स्कूल 25 हजार तथा 18 हजार सिक्योरिटी डिपॉजिट, एच बी कापडिय़ा स्कूल 30 हजार तथा संत कबीर स्कूल 15 हजार तथा छह हजार रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में लेते हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार यह जानकारी उन्होंने निजी जांच व स्कूल की वेबसाइट के आधार पर जुटाई है।

याचिका के अनुसार, शिक्षा के मौलिक अधिकार अधिनियम-2009 के तहत छह से चौदह वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा जरूरी है। इसके तहत राज्य सरकार ने फरवरी 2011 में प्रस्ताव पारित किया। इसका उद्देश्य बच्चों के दाखिले के समय डोनेशन फीस/सिक्योरिटी डिपॉजिट/ दाखिला फीस नहीं लेना है। यदि कोई भी स्कूल या संस्थान इस प्रस्ताव का उल्लंघन करता है तो स्कूल को डोनेशन फीस या अन्य फीस का दस गुणा जुर्माना भरना होगा। लेकिन सरकार की ओर से अनुदानित व निजी स्कूलों की ओर से डोनेशन व अन्य फीस लेकर बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के समक्ष भी गुहार लगाई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुकेश शर्मा Reporting
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