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Gujarat: राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, मध्यस्थता की अवधारणा को अब तक नहीं मिली व्यापक स्वीकृति

President RamNath Kovind, Mediation, National Judicial conference

अहमदाबाद

Published: April 09, 2022 09:55:48 pm

अहमदाबाद. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि कुछ अड़चनों के कारण न्यायपालिका में मध्यस्थता की अवधारणा को अभी व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। हालांकि न्याय में इच्छित परिणाम के लिए सभी पक्षों को मध्यस्थता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए। वे शनिवार को गुजरात के नर्मदा जिले में केवडिया स्थित स्टेच्यू ऑफ यूनिटी परिसर के पास एकतानगर में मध्यस्थता व सूचना प्रौद्योगिकी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यायिक क्रॉन्फ्रेंस का उद्घाटन कर रहे थे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि मध्यस्थता को लेकर हर किसी को यह स्वीकार करना होगा कि इस अवधारणा को अभी तक देश भर में व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है। कुछ स्थानों पर पर्याप्त प्रशिक्षित मध्यस्थ उपलब्ध नहीं हैं। प्रशिक्षण के महत्व पर भी जोर देेते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर प्रारंभिक पाठ्यक्रम से लेकर मिड करियर प्रोफेशनल के लिए रिफ्रेशर कोर्स तक विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकता है।
मध्यस्थता केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं नहीं होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन मध्यस्थता केंद्रों में सुविधाओं को उन्नत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय तक सबकी पहुंच में सुधार करना, न्याय वितरण प्रणाली को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) में परिवर्तित करने का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए ताकि व्यापक आबादी को न्याय मिलने में इस प्रभावी उपकरण से लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में विवादों के वैकल्पिक निवारण की प्रणाली न्यायपालिका में प्रभावी साबित हुई है। विशेष रूप से दीवानी मामलों में इससे सुखद समाधान लाया जा सकता है। सभी पक्षों के निराकरण के लिए मध्यस्थता को प्रभावी माना गया है और इसे प्रोत्साहन भी दिया गया है। कई कानूनी विद्वानों का यह भी मानना है कि नागरिक अधिकारों के संदर्भ में लोगों के बीच अदालतों में लंबित अधिकांश मामले ऐेसे हैं जिसमें फैसले की जरूरत नहींं है। ऐसे मामलों में सभी पक्ष मध्यस्थता से विवाद का समाधान किया जा सकता है।
सभी व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर जोर देते हुए न्यायपालिका में वैकल्पिक विवाद निराकरण (एडीआर) प्रक्रिया और सूचना व संचार तकनीक (आईसीटी) दोनों महत्वपूर्ण हैं। इससे प्रणाली को ज्यादा कार्र्यशील बनाने में मदद मिलेगी और न्याय दिलाने में ज्यादा सक्षम बनेंगे।
Gujarat: राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, मध्यस्थता की अवधारणा को अब तक नहीं मिली व्यापक स्वीकृति
Gujarat: राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, मध्यस्थता की अवधारणा को अब तक नहीं मिली व्यापक स्वीकृति
भारत में कानूनी परिदृश्य बदल सकते हैं लोक अदालत व मध्यस्थता केन्द्र: सीजेआई

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना ने कहा कि लोक अदालत व मध्यस्थता केन्द्रों से वैकल्पिक विवाद निवारण की अवधारणा भारत में कानूनी परिदृश्य को बदल सकता है। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तटस्थ वातावरण में मतभेद का निवारण हो सकता है। गुजरात व्यापारियों के लिए जाना जाता है इसलिए इनसे ज्यादा अच्छी तरह से कोई नहीं जानता कि समय खोने पर पैसा भी खोना पड़ता है। इसलिए विवाद का त्वरित समाधान जरूरी है। महात्मा गांधी का हवाला देते हुए मुख्य न्यायाधीश रमन्ना ने कहा कि गांधीजी कहते थे कि वकीलों का सच्चा काम सभी पक्षों को एक करना है। न्याय प्रक्रिया में अब नई तकनीक का उपयोग होता जा रहा है। कोरोना की वैश्विक महामारी ने न्यायपालिका को और ज्यादा तकनीकी प्रेमी बनाया है।
इस समारोह में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमें न्याय वितरण प्रणाली में आईटी के उपयोग के बारे में गहराई से जानना चाहिए और उसका भरपूर प्रयोग भी करना चाहिए।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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