चार महीनों में कोरोना से जंग जीतकर ड्यूटी पर लौटीं प्रीति

नर्स दिवस पर विशेष

12 दिन आईसीयू, 17 दिन वार्ड में और तीन महीने तक घर में ऑक्सीजन पर रहीं

परिवार के सहयोग, मजबूत मनोबल और उचित इलाज के कारण पूर्व की भांति कर रहीं कार्य

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 11 May 2021, 10:52 PM IST

जफर सैयद

वडोदरा. शहर के सयाजी अस्पताल की एक महिला नर्स चार महीनों से अधिक समय में कोरोना से जंग जीतकर पुन: ड्यूटी पर लौट आई हैं। कोरोना के चलते वह 12 दिनों तक आईसीयू, 17 दिनों तक वार्ड में और 3 महीने तक घर में ऑक्सीजन पर रहीं।
सयाजी अस्पताल में कोरोना मरीजों के वार्ड में ड्यूटी के दौरान प्रीतिबेन जानी (53) भी कोरोना संक्रमित हो गई थीं। सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन स्तर 80 पर पहुंचने के बावजूद सयाजी अस्पताल के आईसीयू में बेड खाली नहीं था। शहर के एक विख्यात निजी अस्पताल में 41 मरीज भर्ती होने के लिए प्रतीक्षा में थे। अपना नंबर आने तक प्रीतिबेन के लिए घर में बैठना संभव नहीं था।
इसलिए घर के समीप स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हुईं। वहां ऑक्सीजन देकर अन्य इलाज शुरू किया गया। वहां भी उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। एक रात करीब 3 बजे अचानक तबीयत खराब हुई। चिकित्सक वहां पहुंचे तो प्रीतिबेन ने कहा कि यह सब-कुछ निकाल दें, उन्हें शांतिपूर्वक मौत चाहिए। चिकित्सक ने हिम्मत दिलाते हुए कहा कि ऐसे हारने से नहीं चलता।
प्रीतिबेन को आईसीयू में स्थानांतरित कर बायपेप मशीन पर रखा गया। सामान्यतया बायपेप मशीन पर रखे जाने के बाद मरीज खाना-पीना छोड़ देता है। इसके बावजूद प्रीतिबेन के लिए पति शैलेष स्वयं सूप, नींबू पानी, हल्दी का पानी, गर्म पानी नियमित तौर पर पहुंचाने जाते।
दिन में एक-दो बार वीडियो कॉलिंग की अनुमति होने के कारण प्रीतिबेन की हालत देखकर पति शैलेष और पुत्री कृपा अलग-अलग कमरों में जाकर रोने लगते। इसके बावजूद प्रीतिबेन के सामने वे दोनों अपने-अपने चेहरे पर हंसी रखते थे। लगातार 12 दिन तक आईसीयू में रहने के दौरान छत पर जाकर नीचे कूदने का विचार भी प्रीतिबेन के मन में आया। तब पति और पुत्री ने निरंतर हिम्मत दिलाई।
धीरे-धीरे हालत में सुधार होने पर 13वें दिन उन्हें वार्ड में स्थानांतरित किया गया। वे 17 दिन तक वार्ड में और कुल 29 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई। उसके बाद भी घर में 3 महीने तक लगातार वे ऑक्सीजन पर रहीं। इसके बावजूद हिम्मत हारे बिना ही वे संघर्षकर धीरे-धीरे सामान्य हुईं और कोरोना से जंग जीतकर करीब चार महीने से अधिक समय बाद अब ड्यूटी कर रहीं हैं।

Rajesh Bhatnagar
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