अल्पेश को भी राजस्थान में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी

अल्पेश को भी राजस्थान में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी

Pushpendra R.Singh Rajput | Publish: Nov, 10 2018 10:16:09 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 10:16:10 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

धानाणी छत्तीसगढ़, मोढवाडिया, सिद्धार्थ पटेल मध्यप्रदेश में करेंगे चुनाव प्रचार,
नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद होंगे रवाना

अहमदाबाद. राजस्थान में गुजरात से सटे सिरोही, जालौर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी कांग्रेस ने विधायक और पदाधिकारियों को सौंपी है। परप्रांतीयों पर हमले में चर्चा में रहे अल्पेश ठाकोर को भी राजस्थान में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अल्पेश संभवत: 20 नवम्बर को राजस्थान और मध्य प्रदेश में जाएंगे। इसके अलावा जालौर व सिरोही में कांग्रेसी नेता जोइता राम पटेल, पूर्व सांसद सागर रायका अपने 25 सहयोगियों के साथ चुनाव प्रचार में जाएंगे।
वहीं डूंगरपुर बांसवाड़ा, और उदयपुर की जिम्मेदारी कांग्रेस के महामंत्री अशोक पंजाबी को सौंपी गई है जो अपने सहयोगियों के साथ चुनाव प्रचार में राजस्थान जाएंगे। अशोक पंजाबी का संगठन डोमेस्टिक वर्कर और कंट्रक्शन लेबर के हित में काम कर रहा है, जिससे उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
वहीं मध्यप्रदेश में अर्जुन मोढवाडिया, दीपक बाबरिया, सिद्धार्थ पटेल और नेता प्रतिपक्ष परेश धानाणी छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हिम्मतसिंह पटेल भरतपुर और दौसा में अपने सहयोगियों के साथ चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभालेंगे। मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाके झाबुआ में राज्यसभा सांसद नारण राठवा और पूर्व सांसद प्रभा तावियाड को जिम्मेदारी सौंपी गई, जो कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं को रिझाएंगे।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए वरिष्ठ नेताओं की करीब 100 लोगों की सूची बनाई गई है, जिनको विधानसभा चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ये नेता राजस्थान के लिए रवाना होंगे। विशेष तौर राजस्थान और मध्य प्रदेश के काफी लोग गुजरात में धंधा-रोजगार लिए बसे हैं। इसके चलते राजस्थान और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को रिझाने में यह नेता अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मूंगफली 650 करोड़ की, खर्च 850 करोड़!
राज्य सरकार ने वर्ष 2018 में समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीदारी की घोषणा की है। ऐसे में इस योजना का लाभ लेने वाले और मूंगफली बेचने वाले किसान लम्बी कतारें लगाकर रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। एक नवम्बर से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है, लेकिन पन्द्रह नवम्बर को मूंगफली की खरीदारी प्रारंभ होगी तो तब तक आर्थिक तौर पर कमजोर और जरूरतमंद 70 फीसदी किसान मूंगफली बेच देंगे। इसका फायदा व्यापारियों, दलालों और संग्रहखोरों को मिलेगा और वे यही मूंगफली सरकार को समर्थन मूल्य पर देंगे। इस योजना में जहां मूंगफली की खरीदारी 650 करोड़ रुपए की होगी । वहीं इस योजना पर खर्च 850 करोड़ रुपए होगा। गुजरात कांग्रेस समिति के प्रवक्ता डॅ. मनीष दोशी ने यह आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली में चार हजार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था। अब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार तक नहीं किया गया ऐसे में भाजपा सरकार एक बार फिर मूंगफली, उड़द और अरहर समर्थन मूल्य के बहाने कितना फायदा देगी?

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