सोमनाथ के संग्रहालय में भगवान गणपति परिवार की दुर्लभ शिल्पमूर्ति

भक्तों को आकर्षित कर रही

सोमनाथ महादेव के प्राचीन मंदिर के शिल्प अवशेषों में मिली थी

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 10 Sep 2021, 10:41 PM IST

भास्कर वैद्य

प्रभास पाटण. सोमनाथ महादेव के प्राचीन मंदिर के शिल्प अवशेषों में मिली भगवान गणपति परिवार की दुर्लभ शिल्पमूर्ति इन दिनों सोमनाथ संग्रहालय में भक्तों को आकर्षित कर रही है।
सात बार खंडित व प्रत्येक बार पुनर्निर्मित सोमनाथ महादेव मंदिर के नवनिर्माण से पहले के प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष व शिल्प अवशेषों को सोमनाथ ट्रस्ट के यात्री सुविधा केंद्र में निर्मित संग्रहालय में सुरक्षित रखा है।
इनमें विघ्नहर्ता भगवान गणपति परिवार की शिल्पमूर्ति भक्तों व संग्रहालय देखने के लिए आ रहे लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनी है। भक्तगण भी इस शिल्पमूर्ति को वंदन व आस्था से निहारते हैं।
इस शिल्पमूर्ति के बारे में दी गई जानकारी में गणपति को विघ्नहर्ता बताया गया है। गणपति में ग को ज्ञान, ण को मोक्ष और पति को परब्रह्म का प्रतीक बताया है। जानकारी दी गई है कि गणपति का एकदंत नाम सर्वशक्तिमान का द्योतक है और हेरंब मतलब दुर्बल का रक्षणकर्ता माना जाता है। बिना जनक की उत्पत्ति होने के कारण गणपति को विनायक कहते हैं।
गणपति का शरीर रहस्य भी दार्शनिक विचार से विचारणीय बताया गया है। गणपति के गजमुख की पौराणिक कथा है लेकिन गजमुख के ग का लक्ष्य या उद्देश्य है और ज का प्रयोग उत्पत्ति के अर्थ में किया जाता है। अत: गणपति के पूजन में उद्देश्य की पूर्ति होती है। सूक्ष्म नजर, विशाल कर्ण और उदय को आध्यात्मिक भाव का उन्नयन करने वाला माना गया है।
गणपति के वाहन मूषक है और मूष का मतलब चुराना, हरण करना है। मनुष्य के आनंद भाव और बुरी वस्तुओं को मूषक बिना भेदभाव के चुराता है। उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में रहकर जीव भले-बुरे से निर्लिप्त रहता है। शिव ने गणेश को गणों का स्वामी बनाया। पंचदेव में गणेश का स्थान है। गणेशपूजा की सर्वमान्यता के कारण कला में गणपति प्रतिमा प्राचीनकाल से प्राप्त होती है।
देश के द्वादश में से प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव मंदिर के दर्शन गृह में गणपति की मूर्ति विराजमान है, मंदिर परिसर में प्राचीनकाल से गणपति का मंदिर है। गणपति-गजानन को पंचदेव माना जाता है इसलिए सोमनाथ ट्रस्ट अधीन सभी शिव मंदिरों में गजानन की दिव्य मूर्ति आस्था-परंपरा के साथ वर्षों से विराजमान है। इनमें प्राचीन अहिल्याबाई सोमनाथ मंदिर परिसर में भी गणपति का मंदिर है।

Rajesh Bhatnagar
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