‘ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है...’

‘ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है...’

Uday Kumar Patel | Publish: Oct, 13 2018 11:47:14 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

-जाने-माने मानव अधिकार कार्यकर्ता व वरिष्ठ वकील गिरीश पटेल की याद में स्मरणांजलि

 

अहमदाबाद. ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है... मशहूर फनकार साहिर लुधियानवी के लिखे इस बेहतरीन गीत को बजाकर जाने-माने मानव अधिकार कार्यकर्ता व वरिष्ठ वकील गिरीश पटेल को शनिवार को स्मरणांजलि दी गई।
वैसे तो आम तौर पर लोगों के निधन के बाद शोकसभा या बेसना का आयोजन किया जाता है। इसमें परिजनों की आंखों से नहीं थमने वाले आंसुओं का सिलसिला चलता है और मृतक व्यक्ति की याद में भजन या आरती जैसे गीतों को बजाया जाता है लेकिन गुजरात में वंचितों, शोषितों, दीन-दुखियों, मजदूरों, श्रमिकों की आवाज बनने वाले गिरीश पटेल की याद में उनके ही कहे गए एक संबोधन से स्मरणांजलि आयोजित की गई।
गुजरात में जनहित याचिकाओं की अवधारणा देते हुए 200 से ज्यादा पीआईएल करने वाले तथा सुप्रीम कोर्ट , गुजरात उच्च न्यायालय के कई जजों के शिक्षक रह चुके पटेल का गत छह अक्टूबर को 86 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उन्होंने अपने वसीयत में उनके निधन पर शोक नहीं मनाने की बात कही थी।
इसलिए उनकी दो बेटियों, पत्नी व उनके मातहत काम करने वाले मानव अधिकार कार्यकर्ता व गुजरात उच्च न्यायालय में वकील आनंद याज्ञिक की मदद से स्मरणांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें उनके आठ वर्ष पहले का एक वीडियो दिखाया गया।
गिरीश पटेल वर्ष 2010 में एक कार्यक्रम के लिए मुंबई गए थे, तब वहां पर उन्हें कहा गया कि वे इस कार्यक्रम में वह सभी बातें बोलें कि जैसे यह उनके जीवन का आखिरी संबोधन है।
डेढ़ घंटे वाले इस वीडियो में तब उन्होंने कहा था कि यह काफी दुर्लभ अवसर है। पटेल ने कहा था कि कोई भी मरना नहीं चाहता, लेकिन मृत्यु तो अवश्यंभावी है, निश्चित है। उन्होंने कहा था कि वे कोर्ट में दलील करते समय हार्ट अटैक से नहीं मरना चाहते हैं और ऐसा ही हुआ।
उन्होंने कहा था कि जिंदगी तो सभी जीते हैं, लेकिन जिदंगी अर्थपूर्ण होना जरूरी है। जिंदगी को जश्न या उत्सव की तरह जीना चाहिए। उनका मानना था कि वे अपनी जिंदगी अर्थपूर्ण तरीके से जिए।
स्मरणांजलि के अंत में पहले साहिर लुधियानवी के ही बोल के गीत ‘वो सुबह कभी तो आएगी’ को कुछ देर बजाया गया और अंत में साहिर के ही खूबसूरत नग्मे ‘ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है ’ से कार्यक्रम का समापन किया गया। उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं। दिल भर आया था।

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