Ahmedabad News, corona, diarrhea, risk : दस्त से पीडि़तों में भी कोरोना के संक्रमण की जोखिम संभव

गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. श्रवण बोहरा ने अमरीकन जर्नल ऑफ गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजी में नए अध्ययन के बारे में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 18 Apr 2020, 04:39 PM IST

अहमदाबाद. कुछ रोगियों में जठरांत्र (गेस्ट्रोइन्टिस्टनल) संबंधी विशेष तौर पर दस्त के लक्षण भी कोरोना वायरस के संक्रमण के पहले संकेत के तौर पर अनुभव किए जाते हैं, उनमें कोविड-19 से पीडि़त होने की जोखिम संभव हो सकती है। शहर के एक निजी अस्पताल के गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजिस्ट (जठरांत्र विशेषज्ञ) डॉ. श्रवण बोहरा ने इस संबंध में किए गए नए अध्ययन के बारे में अमरीकन जर्नल ऑफ गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजी में मार्च 2020 में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
उनके अनुसार कुछ रोगियों में श्वसन संबंधी लक्षण बीमारी में बाद में दिखाई देते हैं, और कुछ रोगियों में श्वसन संबंधी लक्षण विकसित नहीं होते। यह निष्कर्ष महत्वपूर्ण है क्योंकि कोरोना संक्रमण के क्लासिक लक्षणों खांसी, सांस लेने में परेशानी और बुखार का निदान नहीं होने पर भी संभवतया दूसरे लोगों में यह बीमारी फैल सकती है। फिर भी ध्यान देना चाहिए कि पाचन संबंधी समस्याएं सामान्य हैं और जरूरी नहीं है कि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस का संक्रमण है।
चिकित्सकों को पहचानना चाहिए कि एक संभावित कोरोना पॉजिटिव रोगी के संपर्क में आने वाले लोगों में अचानक पाचन संबंधी लक्षण दिखाई देते हैं, इनके बारे में भी कम से कम शीघ्र विचार करना चाहिए। अध्ययन के अनुसार इन रोगियों को जल्दी पहचानने में विफलता भी बीमारी फैलने का कारण बन सकती है। कोरोना वायरस के संक्रमण के संकेत के रूप में पाचन लक्षणों की रिपोर्ट करने वाला यह पहला अध्ययन नहीं है।
इससे पहले, इसी पत्रिका में पूर्व में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि चीन के वुहान के तीन अस्पतालों में कोविड-19 के लगभग 200 रोगियों में से करीब 50 प्रतिशत ने कम से कम एक पाचन संबंधी लक्षण और 18 प्रतिशत ने दस्त, उल्टी या पेट दर्द की शिकायत की थी। हालांकि, उस अध्ययन और अन्य ने हल्की बीमारी वाले रोगियों की बजाए गंभीर बीमारी वाले रोगियों पर ध्यान केंद्रित किया है।
नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने वुहान के तोंगजी मेडिकल कॉलेज के केन्द्रीय अस्पताल में 206 रोगियों की जानकारी का विश्लेषण किया जिसे कोविड-19 रोगियों के लिए एक अस्पताल के रूप में नामित किया गया था। अध्ययन में शामिल होने के लिए, रोगियों को एक हल्की बीमारी की आवश्यकता होती है जैसे-सांस लेने में कठिनाई के बिना या रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होना। कुल मिलाकर 48 रोगियों (23 प्रतिशत) को केवल पाचन संबंधी लक्षणों के साथ, 89 को (43 प्रतिशत) सांस के लक्षणों के साथ और 69 को (33 प्रतिशत) श्वसन और पाचन के लक्षणों के साथ भर्ती किया गया।
अध्ययन के अनुसार पाचन संबंधी लक्षणों (117 रोगियों) वाले सभी रोगियों में लगभग 67 (58 प्रतिशत) को दस्त थे। इनमें से 13 (20 प्रतिशत) ने अपनी बीमारी के पहले लक्षण के रूप में दस्त का अनुभव किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीजों की दस्त एक से 14 दिनों तक चलती है, जिसकी औसत अवधि पांच दिन होती है। पाचन संबंधी लक्षणों वाले लगभग एक तिहाई रोगियों को बुखार का कभी अनुभव नहीं हुआ।
अध्ययन में पाया गया कि पाचन के लक्षणों वाले मरीजों को श्वसन के लक्षणों वाले लोगों की तुलना में बाद में स्वास्थ्य देखभाल करने के लिए कहा जाता है, उनके लक्षणों की शुरुआत श्वसन के लक्षणों वाले लोगों के लिए 11 दिनों की तुलना में औसतन 16 दिन में होती है। सामान्यतया श्वसन, खांसी व बुखार के लक्षणों वाले रोगियों में कोरोना संक्रमण का पता 14 दिन में लगता है जबकि जबकि पाचन संबंधी लक्षणों वालों में 16 दिन में कोरोना संक्रमण का पता लग सकता है लेकिन रोगी भी इस बारे में ध्यान नहीं देते इस कारण निदान होने में समय लग सकता है।
डॉ. बोहरा के अनुसार भारत में सामान्यतया जठर संबंधी परेशानी दो महीनों में होती रहती है, ऐसी परेशानी वाले रोगियों में कोविड-19 से पीडि़त होने की संभावना अधिक हो सकती है। पाचन संबंधी लक्षणों वाले लोगों को अपने शरीर से वायरस को साफ करने में अधिक समय लगता है। कोविड-19 की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने मेें केवल श्वसन के लक्षणों वाले लोगों के लिए 33 दिनों की तुलना में दस्त के लक्षणों वालों में औसतन लगभग 41 दिन लगते हैं।
डॉ. बोहरा के अनुसार पाचन संबंधी लक्षणों वाले लोगों में नया कोरोनो वायरस होने की संभावना अधिक थी, एसएआरएस कोव-2 उनके मल में पाया गया। कुल 73 प्रतिशत के मल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, मात्र 14 की श्वसन के लक्षणों की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। इस अध्ययन से पता चलता है, लेकिन यह निश्चित तौर पर पुष्टि नहीं करता है कि वायरस जठरांत्र संबंधी मार्ग को संक्रमित करता है।
डॉ. बोहरा के अनुसार यह आंकड़े इस बात पर जोर देते हैं कि कोविड-19 पॉजिटिव रोगी के संपर्क के बाद दस्त वाले रोगियों को बीमारी के लिए शंकास्पद माना जाना चाहिए। यहां तक कि खांसी, सांस लेने में पेशानी, गले में खराश या बुखार से पीडि़त भी कोविड-19 पॉजिटिव हो सकता है। वैकल्पिक तौर पर कोविड-19 के लिए श्वसन संबंधी और यदि उपलब्ध हो तो मल के नमूनों का उपयोग करते हुए परीक्षण किया जाना चाहिए।
डॉ. बोहरा के अनुसार कोविड-19 पॉजिटिव रोगी के संपर्क में आने के बाद दस्त के अलावा उल्टी, पेट दर्द, भोजन की और भोजन का स्वाद महसूस नहीं करने की शिकायत वाले लोगों को भी कोरोना-19 पॉजिटिव होने की जोखिम संभव हो सकती है। इसलिए दस्त के अलावा उल्टी, पेट दर्द, भोजन की और भोजन का स्वाद महसूस नहीं करने वाले लोगों को जठरांत्र विशेषज्ञ से संपर्क कर सलाह लेनी चाहिए और जठरांत्र विशेषज्ञ की सलाह पर मल की जांच करवानी चाहिए ताकि कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्र्ट आने पर उसका भी उपचार करवाया जा सके।

Rajesh Bhatnagar Desk
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