सरकारी जमीन के फर्जी कागजात बना ठगी का पर्दाफाश

सरकारी जमीन के फर्जी कागजात बना ठगी का पर्दाफाश

nagendra singh rathore | Publish: Oct, 13 2018 11:06:05 PM (IST) Ahmedabad, Gujarat, India

क्राइम ब्रांच ने एजेंट को पकड़ा, मुख्य आरोपी फरार, कोरे रूल्ड कार्ड मिले,
सरदारनगर स्थित सरकारी जमीन के संबंधियों के नाम फर्जी कागजात

अहमदाबाद. वासणा इलाके में साबरमती रिवरफ्रंट की जमीन के फर्जी कागजात बनाकर उस पर ऋण लेकर चपत लगाने वाली घटना के बाद अब सरदारनगर इलाके में स्थित सरकारी जमीन के फर्जी कागजात बनाकर उसे खुद के व परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर करके ठगी करने का एक मामला सामने आया है।
क्राइम ब्रांच ने एक एजेंट को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी फरार है। सरदारनगर में जिन जमीनों के फर्जी कागजात बनाए गए वह जमीन सरकार की ओर से भारत पाकिस्तान के बटवारे के दौरान पाकिस्तान छोड़कर अहमदाबाद के सरदारनगर इलाके में आने वाले लोगों के लिए सरदारनगर इलाके में आवंटित की गई थी।
इस पूरे घोटाले का खुलासा गुरुवार की देर रात उस समय हुआ जब गश्त व निगरानी पर निकली क्राइम ब्रांच की टीम ने सुभाषब्रिज के पास एक दुपहिया वाहन चालक के संदिग्ध लगने पर उसे रोका। उसके वाहन नहीं रोकने पर उसका पीछा करके उसे कलक्टर कार्यालय के पास पकड़ लिया गया। वाहन चालक ने अपना नाम कुबेरनगर जी वार्ड निवाली केवल नैलाणी (५०) बताया। उसके पास स्थित स्कूटर के कागजात उसके पास नहींथे। इसके अलावा स्कूटर की डिक्की से सरकारी संपत्ति को परिवर्तित करने वाले १३ कोरे रूल कार्ड, प्रोपर्टी कार्ड, सनद और दस्तावेज एवं नोटराइज्ड कागजात बरामद हुए। इनके पासे में संतोषजनक जवाब नहीं देने से उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह सभी कागजात इंदिराब्रिज के पास बंगले में रहने वाले गोपीचंद खुशीराम सिंधी के हैं। ये कागजात भारत पाकिस्तान के बटवारे के समय निराश्रितों को सरदारनगर में आवंटित की गई खुली सरकारी प्लॉट की जमीन से जुड़े हैं। गोपीचंद के यहां केवल तीन साल से कामकाज करता था।
उसने क्राइम ब्रांच को बताया कि गोपीचंद सरदारनगर में स्थित सिटी सर्वे सुप्रिटेन्डेन्ट के कार्यालय एवं तहसीलदार के कार्यालय से कोरे प्रोपर्टी कार्ड मंगवाता, उन प्रोपर्टी कार्ड में गोपीचंद खुदका एवं खुद के परिजनों, संबंधियों व अन्य व्यक्तियों के नाम चढ़वा देता था। प्रोपर्टी कार्ड सरकार की ओर से गैर आवंटित की गई जमीन के बनवाता। उसमें ज्यादातर फर्जी प्रोपर्टी कार्ड, सनद, सेल डीड होती और कई मामलों में तो दस्तावेज भी बनवाता था। यह सभी फर्जी दस्तावेज के जरिए करता था। इसके बाद गोपीचंद इन फर्जी प्रोपर्टी कार्ड के जरिए अन्य लोगों को मोटी कीमत पर जमीन बेच देता था।
केवल के पास से मिले कोरे प्रोपर्टी कार्ड, दस्तावेज, सनद, सेल डीड और कागजात के बारे में सिटी सर्वे-2 कार्यालय के मेन्टेनेंस सर्वेयर से जांच कराने पर कागजात के फर्जी होने और उसमें सरकारी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर होने की प्रथमदृष्टया जानकारी देने पर आरोपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। कोरे प्रोपर्टी कार्ड वो कैसे प्राप्त करता था। उसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी की कोई लिप्तता है या नहीं इसकी जांच की जाएगी।

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