Ahmedabad, Mehsana News : पिता की याद में पुत्र, पौत्र ने गांव में विकसित किया तालाब

99 वर्ष के लिए लिया दत्तक, गांव में अकेले रहने वाले 50 से ज्यादा बुजुर्गों को भिजवाते हैं भोजन के टिफिन

महेसाणा जिले की ऊंझा तहसील के मकतुपुर गांव में है हीराभा दत्त सरोवर

By: Rajesh Bhatnagar

Published: 14 Sep 2020, 11:23 PM IST

संकेत सिडाना

महेसाणा. पिता की याद में एक पुत्र ने अपने बेटे के साथ मिलकर अनोखा कार्य किया है। दोनों ने मिलकर मेहसाणा जिले की ऊंझा तहसील के मकतुपुर गांव में पटेल परिवार ने गांव का एक तालाब 99 वर्ष के लिए दत्तक लिया है। इसे करीब 6 करोड़ रुपए के खर्च से 10 एकड़ जमीन पर विकसित किया है। पिता की स्मृति में तालाब का नाम हीराभा दत्त सरोवर रखा गया है।

करीब एक वर्ष पहले तैयार हुआ यह तालाब इस वर्ष मानसून के दौरान छलक गया। यह तालाब गांव के व अन्य लोगों के लिए अब आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

मकतुपुर गांव के निवासी हीराभाई अमथाराम पटेल की मौत के बाद उनके पुत्र रमेशभाई व पौत्र कल्पेशभाई ने गांव के सरपंच के साथ समझौता कर गांव का काणियां तालाब 99 वर्ष के लिए दत्तक लिया। एक समय इस तालाब में जंगली झाडिय़ों के सिवाय कुछ भी नहीं था। यहां जाने में भी लोगों को डर लगता था। अब यह तालाब मनोरम सरोवर बन गया है। गांव के तालाब को दिया गया प्रतीकात्मक नाम अब वास्तविकता में हीरे समान बन गया है।

रमेशभाई के अनुसार उनके पिता की स्मृति में समाज को गांव में कुछ पुन: लौटाने की भावना के साथ इस सरोवर को विकसित किया गया है।

गत वर्ष सितम्बर में निर्माण कार्य शुरू कर हीराभाई की तीसरी पुण्यतिथि पर कार्य पूराकर इस वर्ष 15 जनवरी को तालाब का लोकार्पण किया गया।

वे बताते हैं कि उन्होंने गांव का कचरा डालने का स्थान बन चुके पौराणिक काणियां तालाब का पुन: निर्माण करवाने का सपना देखा। इसके बाद इसे विकसित करने की ठानी।

तालाब को विकसित करने के साथ ही गांव के लोगों को मनोरंजन के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ता है। गांव से लेकर गांव को अर्पित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष देखरेख पर 10 लाख रुपए खर्च करने की योजना है।
हीराभाई पिछले 35 वर्षों से गांधीनगर में रहते थे। उनके पुत्र रमेशभाई भी वहीं रहते हैं और ठेकेदारी के काम करते हैं।

गांव के लोग भी ठेकेदारी करते हैं और गुजरात में पुलोंं के निर्माण में गांव के लोगों का योगदान है।

ठेकेदारी करने वाले हीराभाई व पुत्र रमेशभाई के साथ साथ उनका पुत्र कल्पेश गांव में रहने वाले वृद्धों के लिए गांव में ही रसोईघर संचालित किया जा रहा है। प्रतिदिन करीब 55 वृद्धों के लिए भोजन तैयार कर टिफिन भिजवाए जा रहे हैं।

यह है विशेषता

तालाब के किनारे लोहे का ब्रिज बनाकर उसे अजय गोल्डन ब्रिज नाम दिया गया है। इस ब्रिज पर चढ़कर पूरा सरोवर देखा जा सकता है। सरोवर के चारों ओर 600 मीटर सड़क का निर्माण करवाया है। 8 मीटर गहरे सरोवर की जलग्रहण क्षमता 95 लाख लीटर है। इसके किनारे 2900 से अधिक पौधे रोपे गए हैं। इच्छाबा परब-प्याऊ का निर्माण करवाया गया है। अमथाभा गार्डन, जिम भी तैयार करवाई गई है। साथ ही पक्षीघर भी बनवाया गया है। इनके अलावा ग्रंथालय और क्रीडांगन भी है। इन सभी सुविधाएं गांव वालों के लिए पूरी तरह मुफ्त है।

Rajesh Bhatnagar
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