सात वर्ष की सजा दस वर्ष में बदली

Uday Kumar Patel

Publish: Jun, 14 2018 04:04:57 PM (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
सात वर्ष की सजा दस वर्ष में बदली

अज्ञानता के कारण उल्लंघन, फैलाएं जागरूकता

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी अशोक परमार को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की सख्त कैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश एम. आर. शाह व न्यायाधीश ए. वाई. कोगजे की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए यह सजा सुनाई। निचली अदालत ने आरोपी को 7 वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी।
फैसले में खंडपीठ ने कई अहम अवलोकन किए हैं। इसमें कहा गया कि कम उम्र में सहमति से यौन संबंध बनाए जाने पर न्यूनतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए छोटी उम्र में ऐसा करने पर कानून माफ नहीं कर सकता। कानून में न्यूनतम 10 वर्ष की सजा का प्रावधान होने पर अदालत भी इसमें कोई छूट नहीं दे सकती।
मामले के अनुसार देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया तहसील के 19 वर्षीय अशोक परमार ने मार्च 2014 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था।
इस मामले में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित भारतीय दंड संहिता की धाराओं व पोक्सो की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने आरोपी को सात वर्ष की सजा सुनाई। राज्य सरकार ने निचली अदालत की सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस याचिका में राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रकाश के. जानी व लोक अभियोजक मितेश अमीन ने दलील दी कि इस मामले में अधिकतम 10 वर्ष की सजा की जानी चाहिए।

जागरूकता फैलानी चाहिए

खंडपीठ ने अपने फैसले में यह बताया कि छोटी उम्र में किशोर-किशोरियां अज्ञानता के कारण इस कानून का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में उनके भविष्य पर इसका प्रभाव पड़ता है। इसलिए खंडपीठ ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग को यह निर्देश दिया है कि इस कानून के प्रभावी जानकारी व सूचना 10वीं व 12वीं कक्षा (सेकेण्डरी व हायर सेकेण्डरी) व कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों को दी जानी चाहिए।

खंडपीठ ने कहा कि इस अपराध को रोकने के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों को सार्वजनिक हित में पोक्सो एक्ट के संबंध में और इस अपराध की गंभीरता के बारे में अखबार, पैम्फलेट, साइन बोर्ड, रेडियो व टेलीविजन के माध्यम से जागरूकता फैलानी चाहिए। इससे बच्चों, अभिभावकों व आम जनता को इस कानून व इसके कड़े प्रावधान का पता चल सके। स्कूलों व कॉलेजों में भी इस संबंध में जागरूकता फैलाई जानी चाहिए। गुजरात में इस तरह की जागरूकता के लिए राज्य सरकार के शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग व अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि पोक्सो के प्रावधानों की प्रभावी जानकारी व सूचना समाज के सभी वर्गों को पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

 

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