डॉक्टरों ने बदल दी सूरत की युवती की किस्मत

डॉक्टरों ने बदल दी सूरत की युवती की किस्मत
Dr. jayprakash modi, Dr. MM Prabhakar And Dr. Mistri

Omprakash Sharma | Publish: Aug, 23 2019 10:22:34 PM (IST) Ahmedabad, Ahmedabad, Gujarat, India

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के...

-रीढ़ की हड्डी में इतना झुकाव था कि सामने देख भी नहीं पाती थी युवती

अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने सूरत की एक युवती की किस्मत ही बदल दी। दरअसल २८ वर्षीय युवती की कमर इस कदर झुक गई थी कि वह सामने पांच फीट से ज्यादा देख भी नहीं पाती थी। अस्पताल में जटिल ऑपरेशन कर युवती को नई जिन्दगी दी है। अपने रोजमर्रा के कामकाज करने में भी असमर्थ इस युवती का ऑपरेशन निशुल्क हुआ है। आमतौर पर इस तरह के उपचार का खर्च निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपए से भी ज्यादा हो सकता है।
सूरत में रहने वाली २८ वर्षीय निर्मलाबेन (नाम परिवर्तित) पिछले दस वर्ष से एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक बीमारी से पीडि़त है। इस बीमारी के कारण उसकी कमर दिन प्रतिदिन झुकती गई। जिसके कारण वह चलने में भी असमर्थ हो गई। अपना रोजमर्रा का काम करने में असमर्थ हुई निर्मला को स्थानीय अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया लेकिन कोई ठोस नतीजे सामने नहीं आए। करीब बीस दिन पूर्व उसे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने जांच करने के बाद ऑपरेशन का निर्णय किया। आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. जयप्रकाश मोदी ने बताया कि १५ दिन पूर्व निर्मला का ऑपरेशन सफलता पूर्वक कर दिया गया। ऑपरेशन से पूर्व ८० डिग्री तक मुडी रीढ़ की हड्डी का झुकाव अब सामान्य हो गया है। रीढ़ की हड्डी को सीधा करने के लिए छह घंटे तक सर्जरी की गई। हड्डी में नीचे से लेकर ऊपर तक २० स्क्रू लगाए गए हैं। आगामी दिनों में यह युवती सामान्य लोगों की तरह काम करने लगेगी। इस ऑपरेशन में डॉ. मोदी के अलावा मितुल मिी व अन्य टीम ने भी अहम भूमिका निभाई।
घर की जिम्मेदारी है युवती के कंधों पर
निर्मला के कंधों पर अपने घर की जिम्मेदारी है। निर्मला ने बताया कि उसके माता-पिता का बीमारी के चलते पहले ही निधन हो गया था। निर्मला की एक बड़ी बहन है जिसकी शादी हो गई। घर में अब उसका छोटा भाई है। दोनों ही मजदूरी करते हैं लेकिन रीढ़ की हड्डी में बीमारी होने के चलते वह काम भी नहीं कर पाती थी। बीमारी के चलते निर्मला इस कदर झुक गई थी कि वह सामने पांच फीट दूरी पर भी नहीं देख पाती थी। लेकिन ऑपरेशन के बाद निर्मला को नई उम्मीद जागी हैं।
निजी अस्पतालों में पांच लाख का हो सकता था खर्च
यदि इस तरह का ऑपरेशन निजी अस्पतालों मेें होता तो लगभग पांच लाख रुपए तक हो सकता था लेकिन सिविल अस्पताल में यह ऑपरेशन निशुल्क हुआ है। एंकायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक यह बीमारी आमतौर पर पुरुषों को ज्यादा होती है। इस तरह की बीमारी प्रति एक हजार लोगों में से किसी एक को हो सकती है लेकिन महिलाओं में सामन्यत इस तरह की बीमारी देखने को नहीं मिलती। देश में बहुत कम सेंटरों पर बीमारी का उपचार होता है जिसमें अहमदाबाद का सिविल अस्पताल एक है।
डॉ. एम.एम. प्रभाकर, निदेशक मेडिसिटी एवं अधीक्षक सिविल अस्पताल

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